SIDBI द्वारा स्वावलंबन चेयर प्राप्त करने वाला उत्तर भारत का पहला विश्वविद्यालय बना वीजीयू, जयपुर,

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जयपुर 1 सितंबर 2022।(निक शिक्षा) सितंबर 2022 को MSMEs के लिए नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र पर संगोष्ठी और SIDBI द्वारा स्वावलंबन चेयर का उदघाटन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ के आर बगड़िया, संस्थापक विवेकानन्द विश्वविद्यालय , डॉ. रवींद्र कुमार सिंह (सीजीएम, सिडबी) और श्री सौरभ बाजपेयी (डीजीएम, सिडबी)ने स्वावलंबन चेयर की उद्घोषणा की।
विवेकानंदा ग्लोबल विश्वविद्यालय को सिडबी द्वारा अगले 3 वर्षों के लिए स्वावलंबन चेयर के लिए सम्मानित किया गया है।विवेकानंदा ग्लोबल विश्वविद्यालय भारत में पहला ऐसा गैर सरकारी विश्वविद्यालय है जिसे यह सम्मान प्राप्त हुआ है। हाल ही में विवेकानंदा ग्लोबल विश्वविद्यालय को समस्त राजस्थान में NAAC A+ मान्यता के साथ सबसे तेजी से बढ़ने वाले विश्वविद्यालय की श्रेणी में सूची बद्ध किया गया है। स्वावलंबन चेयर के रूप में वी जी यू, जयपुर नवोदित नवोन्मेषकों को विचारों से लेकर निष्पादन तक उत्पादों / सेवाओं को विकसित करने में मदद करने के लिए ज्ञान, रसद सहायता और वित्तीय सहायता प्रदान करेगा। यह योजना राज्य के टियर-2 और टियर-3 शहरों के स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को अतिरिक्त बढ़ावा देगी।

सिडबी से वित्त पोषण के साथ वीजीयू एमएसएमई में अभिनव पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने पर ध्यान केंद्रित करेगा । एमएसएमई की समस्याओं का समाधान देने का प्रयास करेगा । फिक्शन, सीआईआई, FIGSI, FORHEX, बीएनआई जैसे विभिन्न उद्योग निकायों ने मुद्दों की देखभाल के लिए वीजीयू से हाथ मिलाया है।
वीजीयू क्षेत्र के समग्र विकास के लिए विभिन्न औद्योगिक संगठनों और मंत्रालयों के साथ काम कर रहा है और तकनीकी परामर्श, क्लस्टर विकास, जागरूकता कार्यक्रम, सॉफ्ट इंटरवेंशन आदि जैसी विभिन्न गतिविधियां करता है।
विश्वविद्यालय ने जयपुर और होसुर में अत्याधुनिक कौशल और नवाचार केंद्र विकसित करने के लिए FIGSI के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं । इसके अंतर्गत FIGSI 50 करोड़ की लागत से इन केंद्रों का विकास करेगा।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों द्वारा विकसित विभिन्न स्टार्टअप और नवीन उत्पादों का भी प्रदर्शन किया गया और श्री ओंकार बगरिया, CEO, VGU ने बताया कि विश्वविद्यालय ने विगत दो वर्षों में 96 पेटेन्ट फाइल किये हैं एवं स्थानीय एमएसएमई को वैश्विक स्तर पर ले जाना चाहता है ।

    कार्यक्रम के दौरान निम्नलिखित विषयों पर तीन पैनल में चर्चा की गई।
    पहला राउंड टेबल विषय – FIGSI द्वारा संचालित स्टोन उद्योग की परंपराएं और संक्रमण ।
    इसमें सम्मिलित प्रतिभागी थे – सौरभ वाजपेयी (संयोजक), अशोक कुमार पाण्डेय, डी के चावला,डॉ. के.आर बगरिया, रविकांत पारीक, आर के गुप्ता, ईशविंदर सिंह, हर्षिंदर सिंह, अनुज मोदी,मनन, बी के शर्मा, सुबोध श्रीवास्तव,और राजेश जैन।
    FIGSI द्वारा संचालित इस चर्चा में बताया कि पत्थर उद्योग को कैसे पोषित किया जा सकता है एवं क्या हैं चुनौतियां होंगी।
    दूसरे राउंड टेबल का विषय था FORHEX द्वारा संचालित भारतीय हस्तशिल्प उद्योग का भविष्य का मार्गदर्शन। इसमे CA अनिल बाफना (संयोजक),डॉ रवींद्र कुमार सिंह, डॉ राहुल मिश्रा, लीला बोर्डिया, जसवंत एस. मील, सुनीत जैन, राजीव अकर, बृज बल्लभ उदयवाल, राम गोपाल सैनी, राजेश डांगोरिया, नितिन शर्मा सलाम मोहम्मद, सुमित श्रीवास्तव, और राजा भंडारी सम्मिलित हुए।
    इसमे हस्तशिल्प क्षेत्र के नवीन विचारों से संबंधित चर्चा की गई। विश्वविद्यालय के छात्र उनकी कैसे मदद कर सकते हैं। क्षेत्र में नए नवाचार क्या हैं। नए युग की प्रौद्योगिकी की भूमिका पर भी चर्चा की गई।
    और अंत में पैनल चर्चा का विषय था सोने की चिड़ियां को जगाओ एसीआईसी वीजीयू द्वारा संचालित। इसमे मुख्य रूप से शामिल होने वाले प्रतिभागी थे श्री अजय डाटा,श्री महावीर प्रताप शर्मा, श्री सुशील शर्मा, श्री ओंकार बगरिया, श्री आदित्य नाथ एवं श्री नमित सोनी। पैनल चर्चा में सीईओ एसीआईसी फाउंडेशन और अन्य ने देश में यूनिकॉर्न के निर्माण के बारे में बात की और वीजीयू कैसे मदद कर सकता है।यह भारत का समय है, भारत में बनाओ, भारत में निर्माण करो और भारत में उपभोग करो।
    सिडबी के सीजीएम डॉ. रविन्द्र कुमार ने,” रुक जाना नहीं गीत को लेकर विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी की तुलना विनोद खन्ना और सिडबी की तुलना किशोर कुमार से करते हुए कहा कि हमें साथ मिलकर काम करना है।”

    डॉ. के. आर. बगरिया ने न्यू एजुकेशन पॉलिसी का सहारा लेते हुए कहा,” कि विद्यार्थियों को उनके अनुसार वातावरण दिया जाए जिनमें वह पढ़ाई के साथ-साथ उनके अंदर के गुणों को भी बढ़ावा दिया जाए ताकि वे अपने जीवन में आगे बढ़ सके।”
    डॉ. श्वेता चौधरी ( डीन, कोड) ने कहा, "कि विद्यार्थी यहां बढ़ने और पढ़ने के लिए आते हैं और शिक्षक भी यहां पर बच्चों के साथ अपना विकास करते हैं।"
    सुशील शर्मा ने राउंडटेबल की चर्चा में कहा, "कि अभी नहीं तो कभी नहीं और उन्होंने यह भी कहा कि उद्यमी को एक मारवाड़ी कटलिस्ट होना चाहिए।"
    आदित्यनाथ ने कहा,"कि यह एंटरप्रेन्योरशिप नहीं है आसान बस इतना समझ लीजिए। एक आग का दरिया है और डूब कर जाना है।"

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