राज्य में केंद्रीय कोविड-19 चिकित्सा गार्डलाइन विरुद्ध नेजो फैरिंजीयल सैंपल प्रोसीजर संबंधी चिकित्सकीय कार्य को गेर कानूनी रूप से नर्सेज से करवाए जाने के निर्णय के विरुद्ध नर्सेज में गहराया असंतोष,, आंदोलन की चेतावनी, ,

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जयपुर 25 अगस्त 2020( निक चिकित्सा) विश्वव्यापी कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए निर्धारित केंद्रीय एवं राजस्थान सरकार चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जारी चिकित्सा गार्डलाइन जिसमें कोरोना आर टी पी सी आर नेजो फैरिंजीयल सैंपल प्रोसीजर के लिए देश एवं विश्व भर मैं ईएनटी स्पेशलिस्ट अथवा पोस्ट ग्रेजुएट रेजिडेंट डॉक्टर ही अधिकृ है।, परंतु पूरे देश में सर्वोत्तम कोरोना प्रबंधन का दावा करने वाली राज्य सरकार का दिनों दिन विफल होता चिकित्सा प्रबंधन चिंता जनक है। रोग निदान एवं चिकित्सा प्रक्रिया में मानव स्वास्थ्य रक्षा से समझौता करते हुए नर्सेज कर्मियों से उक्त चिकित्सीय कार्य को करवाने के लिए 19 अगस्त 2020 को जारी उप शासन सचिव चिकित्सा ग्रुप 3 विभाग के आदेशों से राज्य भर के नर्सेज संवर्ग में तीव्र असंतोष व्याप्त हो गया है। जिसके चलते राजस्थान राज्य नर्सेज एसोसिएशन एकीकृत ने राज्य भर के नर्सेज कर्मियों के निर्णय अनुसार माननीय,महामहिम राज्यपाल ,मुख्यमंत्री, चिकित्सा मंत्री मुख्य सचिव , एवं प्रमुख शासन सचिव सहित समस्त विभागीय अधिकारियों को ज्ञापन भेजते हुए अविलंब उक्त आदेशों को स्थगित एवं संसोधित करने की माग करते हुए राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है । जिसके क्रम में आज प्रतिनिधि मंडल ने निदेशक जन, स्वास्थ्य एवं अतिरिक्त निदेशक प्रसाशन से मिलकर नर्सेज के असंतोष से अवगत कराया।

प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राना, प्रदेश महामंत्री मदनलाल,प्रदेश पर्यवेक्षक भूदेव धाकड़ एवं जयपुर जिला अध्यक्ष अनीश कुमार सैनी ने प्रेस मे बयान जारी करते हुए बताया की राज्य में कोविड को लेकर चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर अलग अलग दो तरह की गाईड लाईन आश्चर्य जनक है। दिनोंदिन अनियंत्रित होते कोरोना संक्रमण का भयावह प्रसार के साथ अन्य मौसमी बीमारियों एवं केंद्र तथा राज्य स्तरीय विभिन्न योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में नर्सेज कर्मी फ्रंट फुट वॉरियर्स के रूप में अत्यधिक कार्य अधिभार एवं लगातार खुद संक्रमित होने के बावजूद पूर्ण मुस्तैदी से डटे हुए हैं,।

राजेंद्र राना,प्रदेश अध्यक्ष
उसी का परिणाम है कि राज्य में कोविड-19 संक्रमित रोगी बड़ी संख्या में रिकवर हो रहे हैं। परंतु राज्य सरकार द्वारा प्रावधान विरुद्ध डॉक्टर्स की बजाय उक्त संवेदन शील चिकित्सकीय कार्य को नर्सेज से करवाने का निर्णय प्रावधानित जन जीवन स्वास्थ्य एवं आदर्श कोविड-19 चिकित्सा प्रबंधन के अनुरूप नहीं है । अतः प्रथम चरण में राज्यभर से तहसील स्तरों तक से विभागीय अधिकारियों के जरिये,मुख़्यमंत्री, एवं चिकित्सा मंत्री महोदय को 31 अगस्त 2020 तक ज्ञापन भिजवाते हुए आदेशो को संसोधित करवाने की मांग की जा रही है। तत्पश्चात भी यदि सरकार द्वारा कोई निर्णय नही किया , तो दूसरे चरण में राज्यव्यापी प्रदर्शनों के लिए नर्सेज कर्मियों को ना चाहते हुए भी विवश होना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि कोविड-19 आपातकाल के चलते राज्य में अधिकतम नर्सेज कर्मी 3 मार्च के बाद से लगातार अपनी जानमाल की परवाह किये बिना, अपने परिवार जनों से दूरी बनाए रखते हुए दिन रात जानलेवा संक्रमण से जूझ रहे हैं। जिन्हें न तो राज्य के चिकित्सक, रेडियोग्राफर, लैब टेक्नीशियन इत्यादि के सामान कोई रिस्क एलाउंस देय है, न ही केंद्र के समान पदनाम परिवर्तन , विभागीय पदोन्नतिया ,एवं प्रवधानित ड्यूटी प्रणाली जैसी सहमति सिद्ध सामान्य कार्यवाहियो का निस्तारण नही होने से नर्सेज कर्मियों के मनोबल में लगातार गिरावट हो रही है। ,जिस ओर सरकार की नजरंदाजगी दुर्भाग्य पूर्ण है। यदि ऐसे ही हालात रहे तो निकट भविष्य में हालात और होने की संभावना है।