World Blood Cancer Day : समय पर लक्षणों की पहचान और उपचार से ब्लड कैंसर को हराना संभव,,

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*जीवनदान परियोजना और सीएमएल-सीएमवाए योजना के तहत निशुल्क उपचार के बाद 160 बच्चों सहित 294 ब्लड कैंसर रोगी अब जी रहे है सामान्य जीवन*

जयपुर 27 मई 2022।(निक चिकित्सा) बार-बार बुखार का आना, शरीर में कमजोरी आना, शरीर में खून की कमी होना, हाथ-पांव में कमजोरी महसूस होना। यह सभी लक्षण सामान्य नजर आते है, लेकिन अगर उपचार के बाद भी यह लक्षण ठीक ना हो तो यह शरीर के रक्त में कैंसर सेल की शुरुआत का संकेत भी हो सकते है। भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर के ब्लड कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ उपेन्द्र शर्मा ने बताया कि बच्चों में ब्लड कैंसर के केसेज काफी तेजी से बढ़ते जा रहे है।

डॉ शर्मा ने बताया कि बच्चों में कई तरह के ब्लड कैंसर होते हैं, जिसकी शुरुआती स्तर में उपचार की शुरुआत करके उन्हें पूर्ण रूप से स्वस्थ किया जा सकता है। उपचार पूर्ण होकर स्वस्थ जीवन जी रहे हजारों बच्चे सामान्य जांच के लिए चिकित्सालय में आते हैं जो अन्य बच्चों की तरह ही स्पोटर्स और फिजिकल एक्टिविटी में भी पूर्ण रूप से एक्टिव होते है।
डॉ उपेन्द्र शर्मा ने बताया कि बीएमसीएच में ब्लड कैंसर से जुड़ी दो परीयोजनाएं चलाई जा रही है, जिसके तहत रोगियों को निःषुल्क उपचार किया जाता है। जिसमें बच्चों के लिए जीवनदान परियोजना है। परियोजना में लो रिस्क वाले तीन तरह के ब्लड कैंसर एक्यूट लिम्फोब्लॉस्टिक ल्यूकीमियां (एएलएल), एक्यूट प्रोमाईलोसाईटिक ल्यूकीमियां (एएमपीएल), होजकिन्स लिम्फोमा (एचएल) शामिल है। अगस्त 2014 से मार्च 2022 तक इस योजना में 6ण्19 करोड़ रूपए की लागत सेे 134 बच्चों को उपचार देकर कैंसर मुक्त किया। यह सभी बच्चे कैंसर सामान्य जीवन जी रहे है। व्यस्कों में होने वाले ब्लड कैंसर के लिए क्रोनिक माईलोइड ल्यूकीमिया कैंसर मुक्ति योजना (सीएमएल-सीएमवाए) है। यह योजना में अगस्त 2015 से मार्च 2022 तक 1.34 करोड़ रुपए की लागत से 160 रोगियों को उपचार देकर कैंसर मुक्त किया गया।

    समय पर उपचार की शुरुआत जरूरी
    डॉ उपेन्द्र शर्मा ने बताया कि जागरूकता की कमी के चलते इस रोग की पहचान नहीं होती और उपचार समय पर शुरू नहीं हो पाती। हर रोगी में शुरुआती लक्षण अलग-अलग होते हैं। जिनमें बार-बार बुखार आना, एनिमियां का उपचार लेने के बाद भी ठीक ना होना, शरीर पर गांठ का उभरना शामिल है। इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि कोई भी असमान्य लक्षण उपचार के बाद भी लम्बे समय तक ठीक ना हो तो कैंसर रोग विशेषज्ञ से एक बार पराषर्म अवश्य करना चाहिए।