*दिया तले अंधेरा* वरिष्ठ अधिवक्ताओं को सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई सूचना नहीं दे रहा है कोर्ट, हाईकोर्ट धरना 84 वें दिन भी जारी रहा,,

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जयपुर 18 अप्रैल 2022।(निक न्यायिक) वरिष्ठ अधिवक्ताओं के मनोनयन में अनियमितताओं को लेकर 25 जनवरी से धरना दे रहे वरिष्ठ अधिवक्ताओं मि काफी रोष है क्योंकि राजस्थान हाई कोर्ट सूचना के अधिकार के तहत वरिष्ठ अधिवक्ताओं के मनोनयन से संबंधित सूचनाएं नहीं दे रहा है हाईकोर्ट ने सूचना देने से इनकार कर दिया है। यह जानकारी दी धरने में शामिल वरिष्ठ अधिवक्ता पूनमचंद भंडारी, विमल चौधरी आदि ने दी।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय को 20 अप्रैल को वरिष्ठ अधिवक्ता जीके गॉड की याचिका मैं बहस के समय यह प्रश्न भी उठाया जाएगा कि राजस्थान हाई कोर्ट सूचना के अधिकार के तहत वर्ष अधिकता ओके चयन की सूचना नहीं दे रहा है।वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि राजस्थान हाई कोर्ट ने इतनी हद कर दी कि जिन अधिवक्ताओं ने सूचना के अधिकार के तहत वरिष्ठ अधिवक्ताओं के मनोनयन से संबंधित पत्रावली के दस्तावेज मांगे तो हाईकोर्ट ने देने से मना कर दिया जिसके विरोध में कुछ वकीलों ने अपील भी दायर कर रखी है हाई कोर्ट को तुरंत पुनर्विचार कर कुछ वकीलों को वरिष्ठ अधिवक्ता का सम्मान देना चाहिए।

    वरिष्ठ अधिवक्ताओं का धरना आज 84 वें दिन भी जारी रहा।
    आज धरने पर विमल चौधरी, पूनम चंद भंडारी, बार काउंसिल के पूर्व चेयरमैन और पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता इंदर राज सैनी बार काउंसिल के पूर्व उपाध्यक्ष एसके जैन राजस्थान हाई कोर्ट बार के पूर्व महासचिव प्रेम शंकर शर्मा, चन्द्र प्रकाश वशिष्ठ, रवि कुमार शर्मा, बाबूलाल शर्मा, राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व अध्यक्ष डॉक्टर पी सी जैन, कृष्ण सिंह जादौन, मनोज पारीक, अर्जुन दायमा, अजय खांडल, सुदर्शन लड्ढा, प्रेम सिंह मीणा, मधुकर श्याम मीणा, सी एम शंकरलाल, अजीत सिंह लूनिया,सम्पत लाल सोनगरा, आई जे खतूरिया, सतीश बलवदा, वी डी अग्निहोत्री, राजेंद्र सिंह, योगेश कुमार टेलर सहित सैकड़ों वरिष्ठ वकीलों ने धरना दिया वरिष्ठ वकीलों ने कहा वकीलों का अपमान नहीं सहेंगे।
    अगर इस समय आंदोलन नहीं किया तो फिर आंदोलन कब होगा ? न्यायपालिका में सुधार की बहुत जरूरत है जजों की नियुक्ति में भी गाइडलाइंस तय होनी चाहिए और जो गाइडलाइंस वरिष्ठ वकीलों के लिए तय की गई है वही गाइडलाइंस नए जज बनाने के लिए होनी चाहिए उनसे भी आवेदन लेने चाहिए वकीलो में से जजों के लिए चयन करने के लिए प्रार्थना पत्र आमंत्रित करने चाहिए महिलाओं में से भी कम से कम 10 महिलाओं को जज बनाना चाहिए और जजों की नियुक्ति के लिए जो कॉलेजियम बनाया जाता है उसमें लोकल जजों का बहुमत होना चाहिए एससी एसटी और दलितों में से भी जज और वरिष्ठ वकील बनने चाहिए।