दागी पुलिस अफसर पर कार्यवाही की मांग,, भीम आर्मी राजस्थान हुए मीडिया से रूबरू,,

79

जयपुर 8 दिसंबर 2021।(निक क्राइम) गलत आचरण में लिप्त पुलिसकर्मियों एवं अधिकारियों के खिलाफ राज्य सरकार ने पिछले छह माह में सर्वाधिक एक्शन लेते हुए करवाई की है। इसके बावजूद कुछ लोग पुलिस अफसरों की आंखों में धूल झोंकने में कामयाब हो रहे हैं। ऐसे ही एक मामले को लेकर भीम आर्मी राजस्थान की तरफ से बुधवार को जयपुर में प्रेसवार्ता आयोजित की गई। इसमें भीम आर्मी के प्रदेश महासचिव जितेंद्र हटवाल और प्रदेश प्रवक्ता शोएब खान ने पत्रकारों को बताया कि जिस पुलिस इंस्पेक्टरों के खिलाफ अवैध हिरासत में रखने, मारपीट करने, जबरन झूठे मुकदमे में फंसाकर दस्तावेजों पर साइन कराने और 3 एससी-एसटी एक्ट के आरोप हैं और जिसके खिलाफ पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज है, उसे सस्पेंड किया जाए। उनका कहना है कि ऐसे दाग़ी पुलिस अफसर को सस्पेंड करते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए, जिससे सभी लोगों के सामने एक मिसाल पेश की जा सके। उन्होंने कहा है कि अगर जल्द ही दागी पुलिस अफसर के ख़िलाफ़ कोई एक्शन नहीं लिया गया तो भीम आर्मी की तरफ से जल्द ही पुलिस प्रशासन के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह ताजातरीन मामला डीजी डिस्क से सम्मानित हुए पुलिस वालों का है।

इस अवार्ड समारोह में शामिल एक पुलिस इंस्पेक्टर के दामन पर अवैध हिरासत के दाग हैं। थाना इंचार्ज रहते किसी को अवैध हिरासत में रखकर ज्यादती करने के आरोप की एफआईआर उसी के थाने में दर्ज हुई। वहीं तत्कालीन पुलिस अधीक्षक का करीबी होने के कारण उसे तब तो दूसरे थाने में लगा दिया गया था, लेकिन हाल ही एसपी बदलने के बाद उसे फील्ड पोस्टिंग से हटा दिया गया। पुराने काम के बदले उसे डीजी डिस्क देने के लिए चुना गया था। बाद में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई, फिर भी वह इस सेरेमनी में डिस्क कैसे ले गया। हालांकि इस मामले की जांच भी एससी-एसटी एक्ट होने के कारण एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारी कर रहे हैं।

    मामले में आईपीसी की धारा 420,467,468,471, 384, 166,167,363, 499, 120-बी एवं 3 एससी-एसटी एक्ट लगाया गया है। डीजीपी डिस्क को लेकर जानकार अफसरों ने बताया कि साफ छवि और उत्कृष्ट कार्यों के लिए यह डिस्क प्रदान की जाती है। भले ही किसी पुलिस वाले का पुराना रिकॉर्ड अच्छा रहा हो लेकिन किसी आपराधिक मामले या आचरण संबंधि आरोप लगने पर जब तक जांच होकर क्लीन चिट नहीं मिल जाए तब तक उसे इस तरह का अवार्ड नहीं दिया जा सकता। पुलिस महानिदेशक तो ऐसे मामले में काफी सचेत रहते हैं, आशंका है नीचे के स्तर पर जानकारी छिपाकर डिस्क दिलाई गई होगी।