कहीं पे शर्मोहया का कोई हिसाब तो है-साहिल – ‘विश्व कविता दिवस’ पर हुआ ‘काव्य कुंभ’ का आयोजन,,

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जयपुर 21 मार्च 2021।(निक साहित्य)‘कलमकार साहित्य यात्रा’ की कड़ी में ‘विश्व कविता दिवस’ पर देश की अग्रणी साहित्य संस्था कलमकार मंच और डॉ. राधाकृष्णन पुस्तकालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘काव्य कुंभ’ में जब ख्यात शायर लोकेश कुमार सिंह ‘साहिल’ ने ‘कहीं पे शर्मोहया का कोई हिसाब तो है/किसी के रूख पे सलामत अभी हिजाब तो है’, एसीपी रामगंज सुनील प्रसाद शर्मा ने पुलिस की व्यथा पर ‘अक्सर मैंने देखा है उसे, झुंड बनाकर आपस में बात करते लोगों के साथ’, चित्रा भारद्वाज ने ‘गम को भी चैन पङ गया किलकारियों के बाद/हम भी सुकूूं से सो गए थे सिसकियों के बाद’, शाइस्ता मेहजबीं ने ‘ मेरी नजर में तेरी फज़ीलत है यह जहां को बताउंगी मैं/तेरी नजर में फिज़ूल गो हूं यह बात सब से छुपा के रखना’, शालिनी अग्रवाल ‘सुकून’ ने ‘पांव रखना दिल की दहलीज पर तो जरा संभल कर/कुछ मासूम से सपने खेल रहे होंगे’, शफ्फ़ाफ़ जयपुरी (अलख सहगल) ने ‘पहली मर्तबा से वो यार जैसा लगने लगा/उसका तकना भी इज़हार जैसा लगने लगा’ और प्राजंल अग्रवाल ने ‘सूरत नहीं, सलीका नहीं, किरदार ज़रूरी है/सच्ची मोहब्बत में बस इंतजार ज़रूरी है’ सुनाई तो लाईब्रेरी सभागार श्रोताओं की तालियों की गडग़ड़ाहट से गुंजायमान हो गया।
इस अवसर पर कलमकार मंच के राष्ट्रीय संयोजक गीतकार निशांत मिश्रा ने कहा कि कोरोना आपदा के कारण बंद पड़ी साहित्यिक गतिविधियों को सुचारू करने के लिए ऐसे आयोजन बहुत जरूरी हैं, वैसे भी साहित्य बहुत लम्बे समय तक घरों के अंदर बंद नहीं रह सकता। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राजस्थान प्रलेस के महासचिव, वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार ईशमधु तलवार ने इस तरह के आयोजन की महत्ता का जिक्र करते हुए कहा कि यह पहला अवसर है जब राजस्थान के किसी लेखक की किताब को प्रतिष्ठित ‘शब्द सम्मान’ मिला है और किताब का प्रकाशक कलमकार मंच भी राजस्थान से है। इससे पहले राजस्थान के किसी प्रकाशक की किताब को यह सम्मान नहीं मिला। प्रसिद्ध व्यंग्यकार एवं मुख्यमंत्री के विशेषाधिकारी फारूक आफरीदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि कविता दिवस महिलाओं के लिए है, क्योंकि प्रत्येक महिला समाज में कविता के रूप में अवतरित होती है।
डॉ. राधाकृष्णन लाईब्रेरी की पुस्तकालयाध्यक्ष रेखा यादव ने अपने उद्बोधन में इस साहित्यिक आयोजन को महत्वपूर्ण बताते हुए सभी आगुन्तकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध उद्घोषक अनुराग सोनी और डॉ. संतोष चारण ने किया।

‘काव्य कुंभ’ में महारानी कॉलेज की प्राचार्य संगीता गुप्ता, महेश कुमार शर्मा, राजेन्द्र गुप्ता, अवेनिन्द्र मान, भागचंद गुर्जर, शशि पाठक, रेणू शर्मा ‘शब्द मुखर’, ज्ञानवती सक्सेना, प्रकाश प्रियम, डॉ. रत्ना शर्मा, शकुन्तला शर्मा, मनोज कुमार सामरिया, सोनू यशराज, जयश्री कंवर, नीरा जैन, कल्पना गोयल, बजरंग नवल, कमलेश शर्मा, डॉ. मंजूलता भट्ट, अरूण ठाकर, सुशीला शर्मा, पार्वती भागनानी, भारती राठौड़, प्रेरक मिश्रा, नाजि़या रिज़वी, मीनू कंवर, स्नेह साहनी, रमा भाटी, अर्चना राठौड़, शिल्पी पचौरी, तारावती सैनी, नंदिनी पंजवानी और बृजलता भारद्वाज ने भी अपनी रचनाएं सुना कर श्रोताओं की वाहवाही लूटी।