# राशन वितरण में नगर निगम भी फ़ेल,,,,, कोई भूखा ना सोए, ना ही मानवता की हत्या हो,इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए सूबे के मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा की खाने के पैकेट व सूखी राशन सामग्री यथोचित पहुंचाई जाए,लेकिन सरकारी अमला कोरोना योद्धाओं की गाथाओं से विलग,वैश्विक आपदा के विकट समय में भी विभिन्न जगहों से आ रही जरूरतमन्दों की सूची पर सरकारी रवैया अपना, आपाधापी व चहेतों को राशन व भोजन देने की होड़ में लगा है,जिससे मजबूर व्यक्ति को उचित समय पर सहायता नहीँ मिल पा रही,,मुख्यमंत्री ज़रा जमीनी स्तर पर मॉनिटरिंग करवा ,ऐसे अफसरों पर नजर बनाने की आवश्यकता है,वरना लॉक डाउन राशन घोटाले का जवाब आपको ही देना होगा,,सीरीज 1st

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जयपुर 20 अप्रैल 2020।(निक विशेष) जहाँ कोरोना जैसी वैश्विक विपदा से निपटने के लिए सूबे के मुख्यमंत्री दिन रात एक कर इससे निपटने का हर सम्भव प्रयास कर रहे हैं,वहीँ राशन वितरण प्रणाली में आपाधापी के चलते हजारों लोगों को आज तलक सामग्री मिलने का इंतजार है।
वजह वही सरकारी ढर्रा व रवैया,कभी सर्वे का बहाना कभी सूची क्रम वार ना उपलब्ध होने की कहानी।
इसी के मद्दे नजर पहले जिला प्रशासन, फिर सिविल डिफेंस और अब नगर निगम द्वारा वितरण की व्यवस्था की गई है।
बावजूद इसके आज भी कोरोना वारियर्स में शुमार सामाजिक संस्थायें व भामाशाह लॉक डाउन-2 में भी निःस्वार्थ निराश्रितों व गरीबों को भोजन करा राज्य की इज्जत ढंके हुए है।
सवाल उठता है कि क्यों नहीं सरकारी अमले को गरीबों का दर्द व पीड़ा नजर नहीं आती,क्यों नहीँ सरकारी अमले के आला अफसरों को गरीबों की रोती बिलखती तस्वीर नजर नहीं आती,ऐसे संक्रमण के काल में भी राशन खरीद फरोख्त व वितरण प्रणाली में सरकारी सोच व अपने व्यक्तिगत स्वार्थ ही हावी हो रहा है।

जिला प्रशासन व सिविल डिफेंस के फैलियर होने के बाद नगर निगम के CO और कलेक्ट्री के प्रभारी क्यों नहीं तालमेल बिठा राशन वितरण प्रणाली को सुगम और सरल बनाने का प्रयास करते क्यों दोनों विभाग अपने अपने चहेतों के आगे नतमस्तक हो अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीँ कर कोरोना की जंग की हराने में योद्धाओं की सूची में शामिल हो बैकुंठ प्राप्त करने का पुण्य नहीँ लेना चाहते,
जब newindia खबर ने पड़ताल की तो बहुत से ऐसे स्थान हैं जो आज भी सरकारी सहायता के इंतजार में आस लगाए बैठे है। मजबूरी ऐसी की ना कोई काम धंधा है ना कोई सहारा।
Newindia खबर CO नगर निगम व जिला कलेक्टर कार्यालय के पंजीयक मुद्रांक अधिकारी से सीधे सवाल करती है कि इतने दिनों के बाद भी वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाकर जरूरतमन्दों को अब तक क्यों नहीं समय पर राशन व भोजन वितरण हो रहा। जबकि मुख्यमंत्री के आदेशानुसार भरपूर मात्रा में राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।
जिला रसद अधिकारी अनुसार अक्षय पात्र व राधा स्वामी संस्थाओ से करीब 1 लाख के ऊपर सुबह शाम के भोजन पैकेट आ रहे हैं,,उनका कहाँ वितरण हो रहा है,स्पष्ट करे,
दूसरा सूखी राशन सामग्री किस दर से खरीदी जा रही है,वह सार्वजनिक करे,सूत्रों के हवाले से खबर है कि मार्केट दर से ज्यादा में यह खरीदी जा रही है ।
सभी DCZone की कार्यप्रणाली पर नज़र क्यों नहीं रखी जा रही।
आलम तो यह है कि कलेक्टर कार्यालय के सभी कमरों में सेनिटाइजर ही उपलब्ध नहीं कराया जा रहा उस पर भी सांप की तरह फन पसारे बैठे हैं इस फन के फनकार,

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जहाँ एक ओर सूबे के मुखिया मुख्यमंत्री,उनके मंत्री व जिला कलेक्टर स्वयं 24 घण्टे राज्य की पूरी व्यवस्थाएं देख रहे हैं वहीं उनके चंद अफसर ,कोई भूखा ना सोए व मानवता की हत्या ना हो के मंसूबो पर पानी फेरने में कोई कसर नहीँ छोड़ रहे,
जबकि भामाशाह व सामाजिक संस्थायें भी हर सम्भव अपने कूबत से बाहर दिल व तिजोरी दोनों खोल कर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ कंधे से कंधा मिला निस्वार्थ भाव से लगे हैं।
क्रमशः,,,

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Report by sunny Atrey,editor Newindia khabar, state president periodical press of India, national journalist association CONTACT MOB.8302118183 WhatsApp 8107068124
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