कलमकार मंच बना अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजन का भागीदार

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वीरां री भूमि मरू, है धोरां मैं प्यार…
‘वर्ल्ड पोएट्री मूवमेन्ट-साहित्य कुंभ’’ में 60 से अधिक साहित्य सृजकों ने किया काव्य पाठ

जयपुर 31 मार्च2019।(निक सांस्कृतिक)‘वीरां री भूमि मरू, है धोरां में प्यार/म्हारा राजस्थान मैं, रोज मनै त्योहार’ सुनीता बिश्नोलिया की इन पंक्तियों से शुरू हुए ‘‘साहित्य कुंभ’’ में प्रेम प्रकाश भूमिपुत्र ने ‘सिर उन्हीं के कटते हैं, जो सिर उठाते हैं’, निरूपमा चतुर्वेदी ने ‘शे’र क्यूँ दर्द का इजहार नहीें हो सकता’, बीकानेर से आई युवा कवि विभा पारीक ने ‘एक दर्द है, गहरी आह में तब्दील होने को/चीख से निकल, बेकल गुम हो जाने को कहीं’, वरिष्ठ शायरा नूतन गुप्ता ने ‘अब की बार जब चली आँधियाँ, तो रेत के बहुत से टीले उखडे अपनी जगह से/जिसको जिधर दिशा मिली उड़ चला’, चित्रा भारद्वाज ने ‘अभी हिज्र दामन में उतरा नहीं है, मगर वस्ल का भी तो चर्चा नहीं है/अभी धूप आँगन मे खुल के न आई, अभी रात से रब्त टूटा नहीं है’ और युवा शायरा शाइस्ता मेहजबीन ने ‘तु मुझको भूल जाएगा मुझे पहले पता था सब/तू किश्तों में सताएगा मुझे पहले पता था सब’ ने अपनी रचनाओं क। माध्यम से कलमकार मंच की ओर से देशभर में चल रही साहित्य यात्रा के अन्तर्गत ‘‘वर्ल्ड पोएट्री मूवमेन्ट’’ के तहत जयपुर के डॉ. राधाकृष्णन पुस्तकालय सभागार में आयोजित कार्यक्रम को काव्यमय बना दिया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन के भागीदार कलमकार मंच के तत्वावधान में करीब चार घंटे चले इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण फेसबुक के जरिए किया गया जिसे देश विदेश में बैठ अनेक साहित्यप्रेमियों ने देखा। इससे पहले साहित्य यात्रा के तहत पिछले साल जयपुर, कोटा, भोपाल, देवास, भानगढ़ और जोधपुर में सफल आयोजन किये जा चुके हैं।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में संस्था केराष्ट्रीय संयोजक निशांत मिश्रा ने बताया कि ‘वर्ल्ड पोएट्री मूवमेन्ट’ के तहत इस तरह का आयोजन करने वाली कलमकार मंच देश की पहली संस्था है। उन्होंने इस अवसर पर संस्था की गतिविधियों और भावी योजनाओं की भी जानकारी दी। वरिष्ठ साहित्यकार दुर्गा प्रसाद अग्रवाल के मुख्य आतिथ्य में आयोजित ‘साहित्य कुंभ’ की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार ईशमधु तलवार ने की। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार एवं समीक्षक राजाराम भादू ने कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए कहा कि इस साहित्यिक आयोजन में बड़ी संख्या में रचनाकारों की मौजूदगी और करीब तीन पीढिय़ों के रचनाकारों की भागीदारी देखकर ऐसे आयोजनों की सराहना की जानी चाहिए। विशिष्ट अतिथि कवि कैलाश मनहर ने इस अवसर पर अपनी राजस्थानी रचना के माध्यम से केन्द्र सरकार पर तीखे कटाक्ष किये।
रचनापाठ करने वालों में निशांत जैन, मनोज कुमार सामरिया, संगीता गुप्ता, विजय लक्ष्मी जांगिड़, मीनाक्षी माथुर, सुन्दर बेवफा, सुशीला शर्मा, प्रकाश प्रियम, विजेन्द्र प्रजापति ‘पोटर’, अर्चना माथुर, राजेश भारद्वाज, शिल्पी पचौरी, तस्वीर नवनीत, उषा दशोरा, सुमन दहिया, सुनील कुमार, शशीकान्त भारद्वाज, शकुन्तला शर्मा, राजकुमार सैनी, सीमा लोहिया, सोनू चौधरी, कविता माथुर, उर्वशी चौधरी, पारूल जैन, ज्ञानवती सक्सेना, मुखर कविता, कमलेश शर्मा, कल्पना गोयल, रक्षिता पारीक, रमा भाटी, शशि पाठक, सुमन कुमावत, अमित जांगिड़, गुरगुल, शैलेश सोनी ‘चिरंजीवी’, अर्चना जैन, संध्या बख्शी, मनीष मिश्रा मणि, अनुपमा तिवाड़ी, रेनू शब्द मुखर, धीरेन्द्र ठाकोर और महेश कुमार शर्मा आदि ने अपनी कविता, गीत, गज़ल सुनाकर सुमधुर काव्यधारा का प्रवाह कर उपस्थित श्रोताजनों से दाद बटोरी। कार्यक्रम संचालन सुनीता बिश्नोलिया ने किया और अंत में आभार वरिष्ठ साहित्यकार उमा ने व्यक्त किया। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार लक्ष्मी शर्मा और पत्रकार सुधांशु माथुर सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी मौजूद थे।