एक हज़ार के घोटाले के आरोपी पर चार्ज बहस शुरू

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सिंडिकेट बैंक में एक हज़ार करोड़ रुपये का घोटाला

जयपुर 3 नवम्बर । सिंडिकेट बैंक के एक हजार करोड़ रुपए के घोटाले में आरोपी भरत बंब के खिलाफ सीबीआई अदालत में आरोप पत्र पर बहस शुरू हो गई है।
सूत्रों के हवाले से सीबीआई ने शनिवार को इस मामले में पेश किए गए सबूतों पर आरोपी से सवाल जवाब किए। इस मामले में उदयपुर स्थित सीए भरत बंब पीयूष जैन, विनीत जैन तथा जयपुर के शंकर खंडेलवाल भी आरोपी हैं।
साथ ही सिडीकेट बैंक के
दिल्ली स्थित तत्कालीन महाप्रबंधक सतीश कुमार, जयपुर के तत्कालीन क्षेत्रीय उप महाप्रबंधक संजीव कुमार, एमआई रोड स्थित शाखा के तत्कालीन मुख्य प्रबंधक देशराज मीणा और जयपुर की मालवीय नगर शाखा के तत्कालीन सहायक महाप्रबंधक आदर्श मनचंदा तथा उदयपुर के तत्कालीन सहायक महाप्रबंधक अवधेश तिवारी के खिलाफ नामजद रिपोर्ट की है।

घोटाले के कई आरोपी सीबीआई की पकड़ से बाहर

इस घोटाले में जयपुर और कोलकाता के कई ऐसे व्यापारी और उद्योगपति शामिल है जिनकी फर्मो में लाखों रूपए आए है और वो खाते अब फ्रिज है। सीबीआई ने अभी इनसे पूछताछ नहीं की है। ये व्यापारी भवन निर्माण व शेयर व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। इनसे पूछताछ की जाए तो घोटाला एक हजार करोड़ रुपए से भी अधिक का निकल सकता है।

धन का दुरूपयोग

आरोपी भरत बंब और शंकर खण्डेलवाल ने करोड़ों रुपए के लोन से जिन-जिन फर्मों से लेन-देन किया गया है, उनसे भी सीबीआई ने कोई पूछताछ नहीं की है। बताया जाता है कि इन फर्मों के और कंपनियों के संचालकों ने लोन से मिली राशि का दुरुपयोग कर इसे दूसरे धंधों में खपाया।

सीबीआई ने अभी तक इन लोगों से कोई जानकारी नहीं ली है ?

विस्वस्त सूत्रों से पता चला है कि जयपुर और कोलकाता के इन व्यवसासियों द्वारा जांच एजेंसियों को प्रभावित करने का भी आरोप है ।
इन पर आरोप है कि एक हजार करोड़ रुपए का लोन फर्जी दस्तावेज से उठाकर रियल स्टेट व दूसरे धंधों में लगा दिया।

बैंक भी अभी नहीं दे रहे पूरी जानकारी

जयपुर के मालवीय नगर और झोटवाड़ा थाने में सिंडीकेट बैंक से लोन गबन का मामला दर्ज हुआ है। फर्जी खातों और दस्तावेजों से करीब 800 करोड़ का लोन उठाया गया था। इनमें से 18 लोन उदयपुर ब्रांच के माध्यम से थे। सीबीआई ने सिडीकेट बैंक से फर्जी दस्तावेज से उठाए गए लोन में जिन जिन खातों में पैसा गया, उन सबकी डिटेल मांगी थी, लेकिन बैंक यह जानकारी देने से बच रही हैं। आधी-अधूरी जानकारी देकर इस घोटाले पर अभी भी पर्दा डालने में लगे हुए हैं। ताकि वे इस घोटाले में शामिल दूसरे लोगों को बचा सके ।
सिंडीकेट बैंक ने इस घोटाले को दबाने के लिए काफी प्रयास किए थे, लेकिन पुलिस में शिकायत होने के बाद यह मामला उजागर हो गया। घोटाले में कई बैंक अफसर भी शामिल होने की संभावना है ।