लक्षणों की पहचान और एक आसान टेस्ट से सरवाईकल कैंसर को मात देना संभव,

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सरवाईकल कैंसर जागरूकता माह विशेष
ऽ सरवाईकल कैंसर की वजह से भारत में हर आठ मिनट में एक महिला की हो रही मौत
ऽ इंटरनेषनल एंजेसी रिसर्च ऑन कैंसर की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2020 में 1.23 लाख से अधिक सरवाईकल कैंसर के मामले दर्ज

जयपुर 21 जनवरी 2022।(निक चिकित्सा) सरवाईकल कैंसर एक मात्र ऐसा कैंसर है जिससे वैक्सीनेशन के जरिए बचा जा सकता है और अगर यह कैंसर हो जाए तो प्रारंभिक अवस्था में उपचार लेकर 90 फीसदी केसेज में रोगी को पूर्णत कैंसर मुक्त किया जा सकता है। यह कहना है भगवान महावीर कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर की रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग की डायरेक्टर एवं वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ निधि पाटनी का।

सरवाईकल कैंसर जागरूकता माह में मौके पर डॉ निधि ने बताया कि भारत में हर आठ मिनट में एक महिला की मौत सरवाईकल कैंसर की वजह से हो रही है। इंटरनेशनल एजेंसी रिसर्च ऑन कैंसर की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2020 में 1.23 लाख से अधिक सरवाईकल कैंसर के मामले दर्ज हुए है।
सर्वाइकल कैंसर को गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर भी कहा जाता है। सर्विक्स, गर्भाशय का निचला संकरा भाग है जो योनि को गर्भाशय से जोड़ता है। इस कैंसर की शुरूआत में कई लक्षण होते हैं जिसके बारे में महिलाओं को जानकारी हो तो इस रोग को शुरूआती अवस्था में ही पकड़ा जा सकता है। इन लक्षणों में पीरियडस अनियमित होना, योनी से बदबूदान पीले पानी का निकलना, शारीरिक संबंध के बाद खून निकलना और पेट के निचले हिस्से में दर्द या सूजन होना शामिल हैं।

एक आसान टेस्ट से पहचान संभव
आमतौर पर कैंसर की पहचान के लिए पेट सीटी, बायोप्सी जैसे टेस्ट करने होते हैं, लेकिन सरवाईकल कैंसर की पहचान एक आसान से टेस्ट पैप स्मीयर से संभव हैं। इस टेस्ट में के जरिए सर्विक्स से सेल्स पार्टिकल्स लिए जाते हैं और में टेस्ट किया जाता है। कुछ घंटों में ही इस टेस्ट की रिपोर्ट आ जाती है। कैंसर उपचार के तीन विकल्प उपलब्ध हैं सर्जरी, रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी। विकल्पों का चुनाव बीमारी के फैलाव,ट्यूमर के आकार-प्रकार, एवं चरण के साथ ही रोगी की आयु और शारीरिक स्थिति देखकर किया जाता है।

    नियमित जांच और जागरूक होना महत्वपूर्ण
    महिलाओं को 21 वर्ष की आयु के बाद अपने वार्षिक स्वास्थ्य जांच के दौरान नियमित रूप से पैप स्मीयर टेस्ट करवाना चाहिए। यह टेस्ट 21 से 65 साल की महिलाओं को तीन साल में एक बार टेस्ट करवाना चाहिए। 65 साल की उम्र के बाद डॉक्टर की सलाह पर ही टेस्ट जरूरत होती है। नियमित रूप से टेस्ट और लक्षणों की पहचान पर जांच मात्र यह दो ही विकल्प है जिससे इस कैंसर की पहचान समय पर की जा सकती है।
    टीकाकरण की भूमिका अहम
    सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पैपीलोमा वायरस (एचपीवी) की वजह से होता है। यह वायरस यौन संबंध व स्वच्छता के अभाव से फैलता है। इसलिये जरूरी है कि किशोरावस्था में ही लड़कियों को यह वैक्सीन लगवाना चाहिए। इस वैक्सीन के तीन डोज होते हैं जो उनके तय समय पर दिए जाने चाहिए। वैक्सीन से सरवाईकल कैंसर से बचाव होता है, लेकिन वैक्सीन के बाद भी पैप स्मीयर टेस्ट डॉक्टर की सलाह के साथ जरूर करवाना चाहिए।