राजनीतिक सामाजिक कॉर्पोरेट सरकारी महकमे आदि में मुखिया के रूप में “रबर स्टैंप” बैठाने के लिए एक लॉबी काम करती है जिससे लाखों करोड़ों का खेल हो सके और अपना स्वार्थ सिद्ध हो सके,, यह आज की हकीकत है इसका इस खबर से कोई लेना-देना नहीं,, क्या सवाई मानसिंह अस्पताल में हुआ कुर्सी का खेल ? इसी वर्ष 50 नई व्हील चेयर डोनेट हुई है अस्पताल को, फिर पुरानी कुर्सी का सवाल किसने और क्यों उठाया यह है जांच का विषय,, पढ़ें पूरी खबर ,,

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डॉ राजेश शर्मा

जयपुर 11 सितम्बर 2021।(निक विशेष) जैसा हम सभी जानते हैं कि अगस्त माह के अंतिम सप्ताह सूबे के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की एंजियोप्लास्टी हुई थी। स्वास्थ्य लाभ लेने के बाद मुख्यमंत्री अपने घर गए और उन्होंने s.m.s. की व्यवस्थाओं साफ-सफाई आदि की प्रशंसा करते हुए ट्वीट किया। लेकिन इसके तुरंत बाद तत्कालीन s.m.s. सुपरिटेंडेंट डॉक्टर राजेश शर्मा को अपने पद से हाथ धोना पड़ा ,कारण बताया गया कि उनका कार्य संतोषप्रद नहीं रहा और साफ सफाई की व्यवस्था भी दुरुस्त नहीं थी । जांच के दौरान मुख्यमंत्री साहब को पुरानी कुर्सी में बैठने का भी अनुभव मिला।

अब सवाल यह उठता है की 2021 में 50 नई कुर्सियां डोनेट होने के बावजूद भी मुख्यमंत्री साहब को पुरानी कुर्सी में क्यों बिठाया गया। घटनाक्रम में सी एम का पहले सीटी स्केन हुआ फिर कैथ लैब ले जाया गया तत्पश्चात् मुख्यमंत्री को जनरल कार्डियक आई सी यू,ले गये,क्या यह सुनियोजित योजना थी ? जबकि मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने सीएम के लिए सुसज्जित वेल इक्विप्ड मेडिकल आईसीयू तैयार कर रखा था। यहां आपको बता दें s.m.s. अस्पताल में प्रत्येक कार्य के लिए डिप्टी सुपरिटेंडेंट एवं एडिशनल सुपरीटेंडेंट को जिम्मेदारी का स्लैब रखा हुआ है।

    बात समझने की है कि मुख्यमंत्री साहब राज्य की धरोहर हैं ऐसे विशेष व्यक्तियों के लिए स्पेशल मेडिकल आईसीयू तैयार है जहां सुपरिटेंडेंट राजेश शर्मा मौजूद थे और मुख्यमंत्री का इंतजार कर रहे थे क्योंकि s.m.s. बहुत पुरानी बिल्डिंग है पीडब्ल्यूडी के देखरेख में आती है जो सवाल उठाये गये उसके अनुसार रातो रात पुराने ढर्रे को बदला नहीं जा सकता । जनरल वार्ड के टॉयलेट आदि व्यवस्था है हंड्रेड परसेंट दुरुस्त नहीं की जा सकती, तो फिर गाज सिर्फ राजेश शर्मा पर ही क्यों गिरी? क्योंकि व्यवस्थाओं के अनुसार हर कार्य के लिए अलग से सहयोगी सुपरिटेंडेंट मौजूद है क्या उनकी कोई नैतिक जिम्मेदारी नहीं है? डॉ राजेश शर्मा ने अपने साथी डॉक्टर से बात भी की थी की मेडिकल आईसीयू में मुख्यमंत्री जी को क्यों नहीं लाया जा रहा उसका कोई संतोषप्रद जवाब नहीं मिला।
    जहां तक राजेश शर्मा का 1 साल के कार्यकाल का सवाल है कोविड की दूसरी लहर जो कि अब तक की सबसे घातक साबित हुई ।ऑक्सीजन की कमी से हजारों लोग मारे गए बावजूद इसके सवाई मानसिंह अस्पताल इससे अछूता रहा । जबकि आर यू एच एस कोविड कार्य के दौरान विवादों में रहा, ऑक्सीजन की कमी के कारण कई मौतें हुई बावजूद इसके वहां के प्रबंधन पर अभी तक कोई ना तो एक्शन लिया गया ना किसी पर गाज गिरी।
    फिर एक तरफा निर्णय क्यों और किस दबाव में लिया गया ।एल एम ओ लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन टैंक जो सात आठ साल से s.m.s. में लगना संभावित था उसे राजेश शर्मा ने अपने कार्यकाल के दौरान स्थापित करवाया। हमारा सवाल सिर्फ इतना सा है इससे पहले भी कई प्रकरण ऐसे आए हैं s.m.s. में अव्यवस्थाओं से संबंधित,, जहां जांच कमेटी द्वारा लिए निर्णय को मान्यता दी गई यहां जांच कमेटी क्यों नहीं बनाई गई ।
    जबकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने दोनों ट्वीट में एसएमएस की व्यवस्थाओं की तारीफ की है अब देखना है कि जांच कमेटी बैठती है या इसी निर्णय को आगे बढ़ाया जाएगा । चिकित्सा मंत्री के अनुसार राजेश शर्मा का 1 साल का कार्यकाल था अब नए सुपरीटेंडेंट को चार्ज सौंपा गया है । सूत्रों के हवाले से यह खबर भी छनकर आ रही है की एक लॉबी के दबाव में आकर एक्सटेंशन यहां भी कईयों को मिले हैं,इस मामलें में क्योँ नहीँ?

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    Special report by SUNNY ATREY
    EDITOR NEWINDIA KHABAR

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