भविष्य निर्माता के.वी.नम्बर 1 के पूज्यनीय गुरुजनों के सम्मान में मिलन समारोह आयोजित ,,

308

जयपुर 6 सितम्बर 2021।(निक शिक्षा)आज‌ के‌ इस चुनौतीपूर्ण ज़िम्मेदारियों से भरे भाग दौड़ पूर्ण जीवन में जब हम‌‌ अपने जीवन स्तंभों से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे में हमारे प्रेरणा स्त्रोत,भविष्य निर्माता के.वी.नम्बर 1 के पूज्यनीय गुरुजनों के सम्मान में शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर होटल सफारी गोपालपुरा मोड़ जयपुर में एक मिलन समारोह आयोजित किया गया।कार्यक्रम में लगभग 22 रिटायर्ड अध्यापक-अध्यापिकाओं ने अपने विद्यार्थियों को शुभकामनायें व शुभाशिष दिया।कार्यक्रम में 1982 के बैच से लेकर 1990-92 तक के विद्यार्थी मौजुद रहे।1988 के बैच के विद्यार्थियों सीमा ब्रिजवासी,सतनाम सिंह,कल्पना शेखावत,किरण,लक्ष्मी सहित सभी के प्रयासों से कार्यक्रम बहुत शानदार रहा।

सिनियर विद्यार्थियों में पूनम खंगारोत ,प्रदीप सिंह,देवेन्द्र सिंह राष्ट्रवर,अजिनकेय रानीडे,मानवेंदर सिंह,गुरिन्दर पाल ,भुपेंद्र सिंह,जितेन्द्र सिंह,अशोक ठाकुर,रवि,पीयुष आदि ने शिरकत की।सभी शिक्षकों को शॉल ओढ़ाकर व मोमेंटो देकर सम्मानित किया।मंच संचालन नवल भाटिया ने किया।
शिक्षक दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के लिये पूनम खंगारोत ने कहा कि ये मेरे जीवन का अब तक का सबसे एतिहासिक दिन था।मेरे विद्यालय केन्द्रिय विद्यालय नंबर १ के मेरे नवमी कक्षा के क्लास टीचर टोरनी सर व अन्य विषयों के अध्यापकों से मिलकर ऐसा लगा जैसे फिर से हम बच्चे बन गये और काश ये वक़्त थम जाए और हम हमारे इन सब गुरुओं की शरण में फिर से जी लें।इस भागमभाग भरे जीवन से कितना प्यारा जीवन था वो।हमारे मार्गदर्शक हमारे साथ हैं।इतना भावुक क्षण थे वो जब हम सबको मिले।सभी अध्यापक भी भावुक हो गए थे व उनकी भी आँखें नम हो गई थीं ।यादें ताज़ा हो गई थी।आज उनके पढ़ाए बच्चे बहुत अच्छा कर रहे हैं।कोई फ़ौजी अफ़सर,कोई पुलिस में तो कोई प्रशासनिक अधिकारी तो कोई समाज सेविका तो कोई डॉक्टर सभी को इस मुक़ाम पर देख सभी अध्यापक गर्वित महसुस कर रहे थे।विद्यालय की प्रार्थना से लेकर राष्ट्र गीत ठीक वैसे ही गाया सबने जैसे बचपन में गाया करते थे।म्यूज़िक टीचर सी एल शर्मा मैडम ने हारमोनियम व एक विद्यार्थी ने तबला बजाकर व कुछ ने स्टेज पर गाकर सभी यादें ताज़ा कर दी।

    स्पोर्ट्स टीज़र सबके प्रिय ठाकुर सर की वजह से हमने क्रीड़ा जगत में एक मुक़ाम हासिल किया था।बचपन के दिन भी क्या दिन थे चिंतामुक्त जीवन मस्ती भरा जीवन ना कोई ज़िम्मेदारी की बोझ ना किसी से कोई बैर हर पल बस ख़ुशियाँ ही ख़ुशियाँ ।
    सादर नमन एवं वंदन हमारे उन सभी शिक्षकों को जिन्होंने हमें ज्ञान दिया ।