सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज परिवाद की जांच की गोपनीयता हुई भंग,, प्रार्थी अनुसार राजस्थान पुलिस जयपुर के जिला नॉर्थ कार्यालय में सीएम हेल्पलाइन के आदेश पर चल रही जांच को एसीपी कोतवाली मेघचंद मीणा ने किया सार्वजानिक,,,

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जयपुर 23 जून 2021।(निक क्राइम) पीड़ित सुनील गुप्ता ने बताया कि उसके द्वारा थाना विद्याधर नगर में मुकदमा दर्ज करवाया गया था जो कि मामले की जांच तत्थाकालीन थानाधिकारी राधारमण गुप्ता के द्वारा मामले में एफआर लगाई गई। पीड़ित ने आरटीआई के तहत पता लगाया कि रिकॉर्ड में हेरफेर करके एफआर लगाई गई है। पीड़ित ने पुलिस महानिदेशक महोदय राजस्थान को शिकायत पत्र दिए जिनके आधार पर शिकायतें सही पाए जाने पर केस री- ओपन करवाया गया और मामले की जांच एसीपी कोतवाली मेंघचंद मीणा को दी गई। मीणा ने भी मामले में एफआर लगा दी । पीड़ित ने पुन: आरटीआई के तहत मामले की जानकारी जुटाई तो पता चला कि मीणा ने किसी अन्य मुकदमा जोकि पंडित श्याम लाल शर्मा राधा कृष्ण मंदिर सेक्टर 2 विद्याधर नगर के द्वारा सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर दर्ज करवाया था जो कि मामले की जांच के लिए सीएम हेल्पलाइन द्वारा मामला भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को जांच हेतु भेजा। जहां पर की डी जी ने मामले की जांच के लिए जयपुर कमिश्नर को पत्र जारी किया । कमिश्नर ने मामला संबंधित जिला नॉर्थ कार्यालय डीसीपी नॉर्थ को जांच हेतु पत्र जारी किया डीसीपी नॉर्थ में मामले की जांच एसीपी शास्त्री नगर के सुपर विजन में करवाई।

पीड़ित सुनील गुप्ता ने अपने मुकदमे की जाँच स्वयं की और पत्रावली की जो आरटीआई से जानकारी जुटाई उस में पता चला कि पुलिस ने मामले को दबाने हेतु पंडित श्याम लाल शर्मा की पत्रावली को पीड़ित सुनील गुप्ता की मूल पत्रावली में शामिल कर पत्रावली न्यायालय में पेश कर दी,जबकि सुनील गुप्ता की पत्रावली का पंडित श्याम लाल के मुकदमे से कोई संबंध नहीं था । यही नहीं सुनील गुप्ता की जांच एसीपी कोतवाली कार्यालय में मीणा के द्वारा की जा रही थी और जबकि पंडित श्याम लाल शर्मा के परिवाद की जांच एसीपी शास्त्री नगर कार्यालय द्वारा की जा रही थी दोनों कार्यालय अलग-अलग थे। इसके साथ साथ ही परिवादी सुनील गुप्ता ने अपने मामले में जो पंडित श्याम लाल शर्मा की पत्रावली की पड़ताल हेतु आरटीआई के तहत जिला नॉर्थ कार्यालय में पत्र दाखिल किया जिसमें की पंडित श्याम लाल शर्मा की संपूर्ण पत्रावली की सूचना परिवादी को दे दी गई जबकि परिवादी का पंडित श्याम लाल शर्मा की पत्रावली से कोई संबंध नहीं था जबकि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 8(1)(ज) के तहत अन्य पक्ष को सूचना नहीं दी जा सकती बावजूद पुलिस ने सूचना सार्वजनिक कर सारे मामले की गोपनीयता को भंग कर दिया। इससे साफ जाहिर होता है कि पुलिस चाहे तो किसी भी मामले में पर्दा डालने हेतु किसी भी हद तक जाकर रिकॉर्ड में हेरफेर कर सकती है। पीड़ित ने मामले की शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो सीएम हेल्पलाइन जयपुर कमिश्नर, डीसीपी नॉर्थ,डीजीपी सभी को शिकायत पत्र के जरिए की है ।

    एसीपी कोतवाली या अन्य इस सन्दर्भ मे अपनी बात रखना चाहे तो NEWINDIA khabar के मोबाइल 8302118183 व WHATSAPP 8107068124 पर संपर्क कर सकते है,उनकी बात भी खबर के माध्यम से सार्वजनिक की जायेगी।

    खबर सुनील गुप्ता द्वारा उपलब्ध कराये दस्तावेजों के आधार पर,,