फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल, जयपुर दो अलग-अलग परिवारों में अन्तर-राज्यीय लैप्रोस्कोपिक किडनी ट्रांसप्लान्ट करने वाला राजस्थान का पहला अस्पताल बना

1151

जयपुर,2 अगस्त,2019ः(निक मेडिकल)फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल जयपुर में डॉ संदीप गुप्ता, एडीशनल डायरेक्टर, यूरोलोजी एवं ट्रांसप्लान्ट सर्जरी, फोर्टिस जयपुर की अगुवाई में विशेषज्ञों की टीम ने सफलतापूर्वक दो मरीज़ों में अन्तर-राज्यीय, नॉन-डोनर, लैप्रोस्कोपिक किडनी ट्रांसप्लान्ट सर्जरी की गई। इसी के साथ फोर्टिस हॉस्पिटल, जयपुर राजस्थान में अन्तरराज्यीय स्वाइप किडनी ट्रांसप्लान्ट करने वाला एकमात्र व पहला अस्पताल बन गया है। 
हरियाणा के 24 वर्षीय(अनिल परिवर्तित नाम)क्रोनिक किडनी फेलियर से पीड़ित थे, उनकी मां अपने पुत्र को किडनी दान करना चाहती थीं। वहीं दूसरी ओर 44 वर्षीय (कानाराम परिवर्तितनाम)उच्चरक्तचाप की समस्या के कारण किडनी काम नहीं कर रही थी, उनकी पत्नी उन्हें किडनी देने की इच्छुक थीं। दुर्भाग्यवश दोनों ही मरीज़ों का ब्लड ग्रुप संबंधी दाताओं से नहीं मिल रहा था और दोनों ही परिवार उपयुक्त एवं इच्छुक डोनर के लिए प्रयास कर रहे थे। हरियाणा निवासी अनिल के परिजनों ने देश-विदेश के कई अस्पतालों में गुहार लगाई। 
डॉ संदीप गुप्ताए एडिशनल निदेशक. यूरोलॉजीए एंड्रोलॉजी  किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरीए फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटलए जयपुर कहते हैं कि ‘‘राजस्थान के कानाराम ने अपने इलाज के लिए डॉ अजय सिंह,नेफ्रोलोजिस्ट, मेट्रो मास हॉस्पिटल से परामर्श लिया मरीज़ की पत्नी उनको किडनी डोनेट करना चाहती थीं परंतु उनका ब्लड ग्रुप भी मरीज़ से मेल नहीं खा रहा था। डॉ अजय सिंह ने इस कड़ी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, रोगी की जानकारी हमसे साझा की। सौभाग्य से हरियाणा निवासी अनिल की जानकारी हमारे रिकॉर्ड्स में उपलब्ध थी और हमने पाया कि हरियाणा के मरीज़ अनिल का ब्लड ग्रुप राजस्थान के मरीज़ डोनर (कानाराम की पत्नी) से मेल खा रहा था और कानाराम का ब्लड ग्रुप हरियाणा परिवार की डोनर अनिल की माता जी से मेल खा रहा था। भारत में स्वाइप किडनी ट्रांसप्लांट सिर्फ मरीज के रिश्तेदार द्वारा ही हो सकता है। मगर इस मामले में डोनर मरीज से किसी भी प्रकार से जुडे हुए नहीं थेए ऐसे में इस पूरी प्रक्रिया के लिए कानूनी मंजूरी हासिल करना एक बडी चुनौती थी। हमेँ इसके लिए दोनों राज्य सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र एवं अनुमति भी हासिल की गई । दो सर्जनए दो नेफ्रोलॉजिस्टए 4 एनेस्थेटिक्सए के साथ अन्य सहयोगी स्टाफ इस पूरे ऑपरेशन को लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से अंजाम देने के लिए तैयार किया गया। इस पूरे ऑपरेशन में 6 घंटे का समय लगाए जिसमेँ दो डोनर और दो रेसिपिएंटए यानि कि चार लोगोँ के ऑपरेशन किए गए।
किडनी फेलियर किडनी की बीमारी का गम्भीरतम चरण होता हैए जो आजकल जीवनशैली में बदलाव और मेटाबोलिक बीमारियोँ जैसे कि हाइपरटेंशन और डायबीटीज आदि के कारण तेजी से बढ रहा है। ट्रांसप्लांटेशन की जरूरत ऐसी बीमारियोँ मे पडती है जिनका इलाज सम्भव नहीं होता है। हालांकिए आजकल परिवारोँ का आकार छोटा होने के कारण कानूनी दानदाताओँ की संख्या बेहद सीमित रहती हैए ऐसे में परिवार के बाहर से डोनर ढूंढना मरीज के लिए बडी चुनौती होती है। 
डॉ राजेश गर्सा कहते हैं अंगदान एक ऐसा तरीका है जिससे हम इस कमी की समस्या को दूर कर सकते हैं। अंगदान उन व्यक्तियोँ द्वारा किया जा सकता है जो ब्रेन डेड हैं अथवा जो जीवित हैं। अपना एक अंग दान करने के बाद ऐसा हो सकता है व्यक्ति के लिए स्वस्थ्य जीवनशैली अपनाकर चलना जरूरी हो जाए मगर उनका एक अंग किसी अन्य व्यक्ति की पूरी जिंदगी बचा सकता है। हमेँ अंगदान के महत्व के बारे में लोगोँ के बीच जागरूकता के प्रसार की जरूरत है और साथ ही इसके बारे में व्याप्त भ्रांतियोँ को भी दूर करने की आवश्यकता है। इसके अलावाए लोगोँ को जीवनशैली से जुडी बीमारियोँ से खुद को बचाए रखने की भी जरूरत है.हर किसी को स्वस्थ्य एवम सक्रिय जीवनशैली अपनाकर चलना चाहिएए नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए ताकि यह पता चलता रहे कि उनका शुगर लेवल कितना है और डायबीटीज पर नियंत्रण बना रहे। इस संवेदनशील सर्जरी में अपनी निपुणता प्रदर्शित करने के लिए भारतीय चिकित्सा बिरादरी के लिए एक अनूठा और अभूतपूर्व अवसर है। फोर्टिस की विरासत हमारे डॉक्टरों की सक्षम टीम द्वारा प्रदान किए गए त्वरित और सावधानीपूर्वक समाधान द्वारा बरकरार रखी गई है। मैं अस्पताल के कौशल के उत्थान के लिए डॉ संदीप गुप्ता डॉ राजेश गार्सा और अन्य सहायक स्टाफ को अस्पताल में उनके असाधारण समर्थन के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं। मुझे यकीन है कि फोर्टिस ऐसे सक्षम चिकित्सकों के साथ भारतीय चिकित्सा बिरादरी के लिए उत्कृष्टता के मार्ग को बढ़ाने के लिए निश्चित है श्ए श्री नीरव बंसलए जोनल निदेशकए फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटलए जयपुरए राजस्थान कहते हैं।
डॉ राजीव लोचन तिवारीए निदेशक. एनेस्थीसियाए डॉ विक्रम अरोड़ा सलाहकार. यूरोलॉजीए डॉ ज्योत्सना भार्गव अतिरिक्त निदेशक. एनेस्थीसिया विनोद ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर और अन्य नर्स और ओटी स्टाफ सर्जरी के दौरान सहायता की।