मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ध्यान दें,, पत्रकार सुरक्षा कानून, लंबित आवासीय योजना का निस्तारण शीघ्र करें वरना पीपीआई फिर उतरेगी सड़कों पर : सन्नी आत्रेय

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जयपुर 21 मई 2022।(निक विशेष) पिछले विधानसभा सत्र में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने बजट भाषण में कहा था कि हमने 70% घोषणा पत्र में किए वादों को पूरा कर लिया है। लेकिन अफसोस की चौथे स्तंभ के लिए उन्होंने कोई ठोस कदम अभी तक नहीं उठाया है। पत्रकार समाज की ओर से कलम के सपाहियों पर आए दिन हो रहे हमलों की मांग को लेकर पीरियोडिकल प्रेस ऑफ इंडिया विगत 2 वर्षों से लगातार इसकी पालना की मांग को लेकर धरने प्रदर्शन ज्ञापन के जरिए आ अवगत कराती रही है।

बावजूद इसके अभी तक इस और ध्यान नहीं दिया गया एक और जहां आप लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को सरकार का अभिन्न अंग मानते हैं पर इसके लिए 3 साल से अधिक समय होने के बावजूद इस ओर कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया है।

    इसी तरह कई वर्षों से पत्रकार साथियों ने आवासीय संबंधित एक नियत राशि जमा करा रखी है। पूर्व में इसी संबंध में लॉटरी के जरिए 576 पत्रकारों को प्लॉट आवंटित हो चुके थे फिर इकोलॉजिकल जॉन का हवाला देते हुए इस योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। पीपीआई के साथ-साथ प्रेस क्लब के वर्तमान व पूर्व के पदाधिकारियों द्वारा आपको समय समय पर व्यक्तिगत व ज्ञापन के जरिए अवगत कराया जाता रहा है। अभी आवासीय योजना की कमेटी बना दी गई है और चिन्हित जगहों पर कमेटी द्वारा सर्वे भी किया जा चुका है । लेकिन अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है कि पुराने आवंटित लाभार्थी पत्रकारों को इसका लाभ मिलेगा या यह प्रक्रिया फिर नए सिरे से शुरू होगी । इससे असमंजस की स्थिति में बनी हुई है। सबसे पहले स्थिति को स्पष्ट कर पत्रकार जगत को कोई ठोस नीति से अवगत कराया जाए। वरना पत्रकारों को मजबूरन आंदोलन की राह पकड़नी होगी। पीपीआई के प्रदेश अध्यक्ष सन्नी आत्रेय अनुसार कांग्रेस के घोषणा पत्र में पत्रकारोँ के लिए किए वादॉ को 3 साल से अधिक बीत जाने के बाद भी अमलीजामा नहीं पहनाया जाने के विरोध में विगत 27 फरवरी 2022 को विशाल धरना दिया गया था । इससे पहले भी शांति मार्च और ज्ञापन के जरिए मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया था।
    अगर 30 दिन के अंदर कोई स्पष्ट संकेत सरकार की तरफ से नहीं मिलते हैं तो पीपीआई अन्य सभी संगठनों व पूर्व में उन पत्रकारों (जिन्हें लॉटरी में आवंटित भूमि दी गई थी) के साथ अगर जरूरत हुई तो मुख्यमंत्री निवास का घेराव भी किया जाएगा।

    पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर पीपीआई द्वारा दिये विशाल धरने के समर्थन में उमड़ा हुजूम,, धरने की सफल कहानी,आमजन व गहलोत सरकार तक पहुंची बात,, सभी पत्रकार एकजुट है उन्हें बांटने की साजिश करने वालों को मिलेगा करारा जवाब :- सन्नी आत्रेय

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