आप ने रीट पेपर लीक प्रकरण ईडी को सौंपने और कोयला संकट को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकार पर निशाना साधा,,

59

जयपुर 2 अप्रैल 2022।(निक राजनीति) रीट पेपर लीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की राजस्थान ब्रांच की ओर से प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज करने को लेकर आम आदमी पार्टी ने भाजपा और कांग्रेस दोनों पर निशाना साधा है।
आम आदमी पार्टी के राजस्थान में चुनाव प्रभारी और दिल्ली की द्वारका से विधायक विनय मिश्रा* ने बताया कि राजस्थान में रीट भर्ती पेपर लीक प्रकरण लाखों अभ्यर्थियों और उनके परिवारों के साथ धोखा हुआ है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार जनता के बीच विश्वास खो चुकी है और अगले साल राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव में पत्ता साफ होने की बात समझ में आ चुकी है इसलिए गहलोत सरकार के मंत्री और चहेते अफसर जमकर भ्रष्टाचार कर रहे है। रीट भर्ती परीक्षा में धांधली इसका उदाहरण है। अब इस मामले में ईडी की जांच शुरू होने से उस पर मोहर भी लग गई है।

उन्होंने उम्मीद की है कि ईडी अपना काम ईमानदारी से करेगी और जो लोग पेपर लीक के लिए जिम्मेदार है उन पर कड़ी कार्रवाई करवाएगी। मिश्रा का आरोप है कि इस मामले में अभी कई प्रमुख लोग अपनी पहुंच के कारण बचे हुए है। राज्य सरकार एसओजी के माध्यम से जांचकर करा मामले में लीपापोती कर रही है। मिश्रा ने इस मामले में केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस मामले में सीबीआई जांच के भी आदेश होने चाहिए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को बिना राजनीतिक दवाब के ये जांच करवानी चाहिए। ये दोनों ही एजेंसिया केंद्र सरकार के अधीन है और ऐसे में उन पर किसी तरह का प्रेशर नहीं होना चाहिए। केंद्र सरकार पर इन जांच एजेंसियों के दुरुपयोग को लेकर कई बार आरोप लग चुके है। उन्होंने राजस्थान की तरह यूपी में हुए परीक्षा भर्ती घोटाले की जांच भी बिना भेदभाव किए ईडी और सीबीआई को सोंपने की कार्रवाई करनी चाहिए। मिश्रा ने आरोप लगाया कि यूपी में भाजपा की सरकार है इसलिए वहां भी केंद्र सरकार ने अपने कदम पीछे कर रखे है।

*महंगे कोयले की खरीद का भार जनता पर डालना गलत*

    विधायक और चुनाव प्रभारी विनय मिश्रा ने कहा कि बिजली कंपनियां कोयला संकट दिखाकर विदेशों से महंगा कोयला खरीद रही है और इसका भार आने वाले दिनों पर जनता पर डाला जाएगा। उन्होंने कहा कि कोयल संकट के लिए बिजली कंपनियां और सरकारें दोषी है। जानबूझकर ऐसी स्थितियां बनाई जाती है जिससे कोयला संकट बना रहे और फिर निजी कंपनियों से महंगा कोयला खरीदकर अपनी जेब भर सके।