जयपुर पुलिस ने रसूखदारों के इशारे पर चार्टर्ड अकाउंटेंट दंपती को‘‘ क्रिमिनल’’ बनाने के लिए रची बड़ी साजिश – सीए अनुपम सोमानी और उनकी पत्नी गीतिका सोमानी को अपराधी बनाने पर तुली पुलिस – लेन-देन के विवाद (सिविल मैटर) को क्रिमिनल केस बनाने के लिए कई थानों में एफआईआर – बजाजनगर में एक ही रात में तीन केस दर्ज किए, महेशनगर और विद्याधरनगर में भी दो केस – सभी एफआईआर का मजमून(भाषा और ड्राफ्टिंग) पढऩे से लग रहा है कि इन सबके पीछे आखिर षड्यंत्रकारी है कौन ? – रकम लौटाने के लिए सीए ने डीडी बनवाकर पेश कर दिए फिर भी गिरफ्तार करने पर आमादा, अपर्णा ने मीडिया के सामने लगाये आरोप,,

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जयपुर 9 नवंबर 2021।(निक क्राइम)जयपुर के किसान मार्ग बरकत नगर के रहने वाले सीए अनुपम सोमानी और उनकी पत्नी गीतिका सोमानी को पुलिस एक सिविल मैटर में क्रिमिनल बनाने पर आमादा है। रचित अग्रवाल (ओम ग्रुप) से लेन-देन का मामला था। बरसों से सीए अनुपम के साथ उनका फायनेंशियल ट्रांजेक्शन होता आ रहा था। हाल ही में कोरेाना काल में दी गई रकम का अधिक ब्याज मांगने पर सीए ने कोरोना संकट और मार्केट में लोगों की व्यावसायिक स्थिति खराब होने का हवाला देकर मोटा ब्याज देने में असमर्थता जाहिर की तो रचित अग्रवाल ने सिविल मैटर को क्रिमिनल ऑफेंस बनाने और सीए दंपती को जेल भेजने की धमकी देकर वसूली करनी चाही। सीए ने फिर भी असमर्थता जता कर ली गई रकम वापस लौटने के लिए कहा तो रचित अग्रवाल ने अपने रसूखों के दम पर पहले एक ही रात में बजाजनगर थाने में सीए दंपती के खिलाफ तीन एफआईआर नंबर. 517, 518, 519/2020दर्ज करा दी। जिसमें प्रोपर्टी के नाम पर रकम लेकर धोखाधड़ी के आरोप लगा दिए, जबकि सीए रचित के साथ कोई ऑफिशियल लेन-देन भी पेंडिंग नहीं है। जिन अन्य लोगों की रकम रचित के मार्फत आई थी, उन्हें भी सीए दंपत्ति रकम लौटाने पर सहमत हैं, इसकी पुष्टि के लिए तीन डिमांड ड्राफ्ट भी बनवा दिए, लेकिन वे रकम वापस लेने के साथ ही सीए दंपत्ति को जेल भेजकर बदनाम करने और पुलिस से सांठगांठ कर परिवार को तबाह करने पर तुले हैं।
बेकसूर सीए दंपत्ति को जेल पहुंचाने के लिए सारे षडयंत्रकारी मिल गए:

यह आरोप मिडिया के सामने लगाये अनुपम सोमनी की बहन अपर्णा ने।
बजाजनगर थाने में तीन एफआईआर दर्ज होने के बाद सीए अनुपन ने कई बार थाने जाकर अपनी सच्चई बताने की कोशिश की। साक्ष्य पेश करने चाहे लेकिन पुलिस ने उसकी एक नहीं सुनी। उलटा भगौड़ा घोषित कर कोर्ट में गलत जानकारी दे दी। जबकि बजाजनगर थाने के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज देखी जाए और उनके केस की जांच कर रहे जांच अधिकारी (आईओ) देवी सहाया एएसआई के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल की जांच कराई जाए तो पता चल जाएगा कि अनुपम की लगातार देवी सहाय एएसआई से बात हो रही थी। उनके बुलाने पर वह थाने भी जा रहे थे। सभी जानकारी दी, दस्तावेज उपलब्ध कराए और यहां तक कहा कि एफआईआर में जिस रकम को धोखाधड़ी का आधार बताय है उसे वे वापस लौटाने को पहले भी कई बार कह चुके, अब पुलिस के जरिए भी डिमांड ड्राफ्ट बनाकर वापस लौटाना चाहते हैं, लेकिन पुलिस ने उसकी एक नहीं सुनी। उलटा उन्हें डराया-धमकाया जाता था, कभी परिवार को भिखारी बना देने तो कभी पकड़ लेकर आने की बात कहते। पुलिस वालों ने यह कहकर खूब धमकाया कि अब तुम्हारा अगला ठिकाना जेल है। तुमने गलत लोगों से पंगा ले लिए।
अनुपम सोमानी की बहन अपर्णा मालपानी ने अपने भाई-भाभी के बेकसूर होने के लिए पुलिस कमिश्नर से लेकर तमाम पुलिस अधिकारियों तक गुहार लगाई है। अनुपम सोमानी की मां मंजू देवी ने ब्याज माफिया और पुलिस द्वारा मिलकर बेटे-बहू को जबरन अपराधी बनाने की साजिश को लेकर पीएम नरेन्द्र मोदी और सीएम अशोक गहलोत को भी पत्र लिखकर गुहार लगाई थी। पीएम नरेन्द्र मोदी के ऑफिस से पिछले माह चीफ सेक्रेटरी के नाम आदेश आया है, जिसमें लिखा है कि इस मामले को गंभीरता से देखा जाए और निदान करा एक कॉपी गर्वमेंट पोर्टल पर अपलोड की जाए, लेकिन चीफ सेक्रेटरी कार्यालय ने भी मामले को हवा में उड़ा दिया। चिट्ठी आने के बाद न पीडि़त की मां और बहन से कोई जानकारी ली गई न मामले का निस्तारण हो पाया।

    अनुपम की बहन अपर्णा ने जयपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
    पुलिस से सवाल नं. 1- पुलिस ने दो पक्षों के बीच लेन-देन (दीवानी मामल) को पुलिस ने धोखाधड़ी करान देकर क्रिमिनल केस ( फौजदारी) बनाकर सनसीखेज क्यों बनाया। पुलिस ने दिसंबर के आखिरी वीक में एक ही व्यक्ति की तरफ से अनुपम सोमानी और गीतिका पर धोखाधड़ी की तीन एफआईआर दर्ज कर डाली। लेन-देन का विवाद अनुपम सोमानी से है, गीतिका के नाम से न कोई ज्वाइंट अकाउंट है, न उनके खाते में कोई रकम आई, फिर पुलिस ने सीएम पत्नी को भी धोखाधड़ी के केस में आरोपी बनाकर एक मां को उसकी दो छोटी बेटियों से अलग करने का काम किसके इशारे पर किया। बजाजनगर में दर्ज तीनों एफआईआर में एफआईआर वाहक का एक ही नाम दर्ज है, जिसने तीन लोगों के नाम से अलग अलग एफआईआर दर्ज कराई है, जबकि एफआईआर दर्ज कराने वाले के पास जिन लोगों ने केस दर्ज कराया उसके नाम रजिस्टर्ड पावर ऑफ अर्टानी भी नहीं है। ऐसे में पुलिस ने कैसे एफआईआर दर्ज कर ली। हाल ही में 27 जुलाई को अनुपम और गीतिका के खिलाफ महेशनगर थाने में 267/21, और इसी दिन विद्याधरनगर थाने में 281/21 नंबर एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। दो अलग अलग थानों में एक ही दिन दर्ज इन दोनों एफआईआर को दर्ज कराने वाले अलग-अलग व्यक्ति हैं, लेकिन दोनों एफआईआर की भाषा समान है, ऐसे में साफ पता चलता है कि ये दोनों व्यक्ति भी आपस में मिले हुए हैं और इन एफआईआर में जिन चेक नंबरों के आधार पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है, वह चेक अनुपम ने कभी रचित अग्रवाल को दिए थे। तीन बरस पहले इसकी सूचना भी रचित को रजिस्टर्ड एडी से भिजवाई गई थी, जिसका प्रमाण भी है, फिर वह चेक इन लोगों तक कैसे पहुंचे जिन्होंने एफआईआर दर्ज कराई। मतलब साफ है कि इस खेल के पीछे मास्टर माइंड रचित अग्रवाल है और वही पुलिस के साथ मिलकर अलग-अलग लोगों से एक के बाद एक एफआईआर दर्ज करा सीए दंपत्ति के पीछे पड़ा है। पुलिस और कानून का सर्वथा गलत इस्तेमाल हो रहा है।
    पुलिस से सवाल नं. 2- पैसों के लेन-देन के दीवानी मामले को फौजदारी केस बनाकर डंडे के जोर पर करोड़ों रुपए वसूलने की साजिश रचने वाले जालसाजों के चक्रव्यूह में फंसे चार्टड अकाउंटेट (सीए) परिवार को नेता-अफसर और माफिया मिलकर प्रताड़ित कर रहे हैं। सीए की मां मंजू देवी इस मामले में जयपुर पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव से गुहार लगाने गई थी। वहां वेटिंग रूम में जयपुर सांसद रामचरण बोहरा मिले तो मां ने उनसे मदद मांगी और बेटे के विवाद में पुलिस द्वारा बहू को जबरन फंसाने का मामला उन्हें भी बताया। सांसद ने गुहार सुनकर पुलिस कमिश्नर से मामले में सही जांच करने व परिवार की मदद के लिए कहा तो सांसद के सामने ही 66 वर्ष की वृद्धा और उनकी बेटी को कहा कि जिस रचित अग्रवाल ने आपके बेटे के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है, मां-बेटी के पैरों तले से जमीन खिसक गई, बड़ी उम्मीद से वे सांसद को लेकर पुलिस अफसर के पास गई थी।

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    पुलिस से सवाल- नं. 3- दिसंबर की लास्ट वीक में रात 11 से 2 बजे तक एक ही थाने में एक ही व्यक्ति की तरफ से तीन एफआईआर:
    धोखाधड़ी के जिन आरोपों में सीए अनुपम सोमानी निवासीव उनकी पत्नी गीतिका पुलिस के डर से छिपते फिर रहे हैं। उन मामलों की एफआईआर के दर्ज होने का समय और मजमून भी चौंकाने वाला है। उनके खिलाफ बजाज नगर थाने में 24 से 25 दिसंबर 2020 की रात 11 से 2 बजे के बीच एक के बाद एक तीन3 एफआईआर तो रचित अग्रवाल निवासी जवाहर नगर सवाईमाधोपुर ने दर्ज कराई थी। जिनमें थाने पहुंच कर एफआईआर पेश करने वाला व्यक्ति रचित अग्रवाल है और आरोपी अनुपम और गीतिका हैं। एक ही तरह का आरोप दर्ज कराने वाला व्यक्ति भी एक है और आरोपी भी समान है। मामला भी आईपीसी की समान धाराओं 420, 406 का दर्ज कराया गया है। एक तरफ पुलिस दिसंबर के लास्ट वीक में चोरी लूट जैसे अपराध की एफआईआर तक दर्ज करने में कतराती है, वहीं सीए दंपत्ति के खिलाफ एक ही रात में एक ही आरोप की तीन-तीन अलग एफआईआर दर्ज कर ली। जबकि मामला आपराधिक प्रकृति का बनता ही नहीं था, आपसी लेन-देन में सिविल मैटर को पुलिस ने क्रिमिनल केस बना दिया। ताकि मामले में एक-दो नहीं बल्कि तीन तीन एफआईआर होने की आड लेकर सीए दंपत्ति पर दबाव बनाया जा सके। एक मामले में गिरफ्तार हो जाए और जमानत मिल भी जाए तो दूसरे केस में पकड़ लें और दूसरे के बाद तीसरे में दबोच लिया जाए।