कामकाज है ठप्प,, बैंको के फाइनेंस जाल में फंसा आम आदमी,, 21वीं सदी की नई महाजन प्रथा, सरकारी बैंक लोन दे नहीं रहे आसानी से ,प्राइवेट फाइनेंसर 26 से 33 परसेंट तक ब्याज पर उपलब्ध करा रहे हैं लोन, उसके बाद वसूली गुंडों द्वारा,, आरबीआई का नियंत्रण है भी या नहीं इनपर,रिजर्व बैंक क्यों नहीं ले रहा संज्ञान, सरकार को बनानी चाहिए कोई ठोस नीति,सभी की ब्याज दर सुनिश्चित करें अगस्त तक तो MORATORIUM की वजह से बैंकों ने किस्तों में छूट दे रखी थी,पर बैक लगा रहा है MORATORIUM चार्ज,फिर यह कैसी छूट ,,,अब आगे क्या, Newindia khabar का *हल्ला बोल*

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#कानून बनाम गुंडा राज,,अभी कोरोना के चलते बैंको द्वारा

फाइनेंसर की जुबानी संबंधित थाना तो हमारी जेब में है

जयपुर 31 अगस्त 2020।(निक क्राइम)समस्या विचारणीय व गम्भीर है,,इस बाबत कई फिल्मों का निर्माण भी हुआ है,,खबरें भी सुनने को मिलती रहती है कि कर्ज़ तले दबे होने के बैंकों की ,इन निजी फाइनेंस संस्थाओं के तकाज़े के चलते किसानों व अन्य ने आत्महत्या तक का कदम उठाया है,,
फाइनेंस का फैलता मकड़जाल,,,,हमारी अर्थव्यवस्था को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है,
जरूरी नहीं कुछ बाते हंमारे साथ घटित हों पर इसका प्रभाव किसी ना किसी रूप में हंमारे आसपास के वातावरण पर दिखाई पड़ता है,

मैं रावण की औलाद बोल रहा हूँ,,कहाँ है तू,,
मैं कुत्ता बोल रहा हूँ,,पैसे देदे किश्त के वरना काट खाऊंगा,,
मैं भिखमंगा भिखारी हूँ, समझे सीधी तरह किश्त देदे वरना घर का सामान उठा ले जाऊंगा,,
पुनिया दादा का नाम नहीं सुना,,बीप बीप बीप,हलक में से पैसा निकाल ना जानते हैं,,
अरे भाईसाब अभी एक ही तो किश्त due हुई है,,3 दिन में जमा करा ही दूंगा 450 rs पेनल्टी के साथ,,इसमें इतनी गालियां क्यों दे रहे हो,,,
कोई कानून नहीँ है,स्वयं ही फैसला करते हैं यह गुंडे,,,

नीरव मोदी,माल्या,ललित मोदी जैसों पर ना कानून का,ना सरकार का बस चलता है,,

मतलब यह हुआ किसी का खून हुआ ,लूटपाट हुई तो जाओ उसके पास उसका खून कर दो ,लूटलो घर को,,
फिर यह अदालतें ,,,क्योँ हैं ,संविधान में कानून की धाराएं क्यों हैं,,लोन देते समय मीठी मीठी बांते कर सो बार फोन करते हैं, फिर कुछ ही महीनों में असली रूप दिखाना शुरू के देते है,,,इनके पास अरबो रुपये कहाँ से आते हैं,,फाइनेंस के लिए,,

आज बात करते हैं इसी एक औऱ गम्भीर मुद्दे की,,जो हमारे रोज़मर्रा के जीवन मे प्रभाव डाल रही है,,,,
जिसतरह पहले के समय में महाजन प्रथा का बोलबाला था,,हर कोई किसी ना किसी महाजन के यहां अपना सब कुछ गिरवी रख चुका था,औऱ ता जिंदगी सूद चुकाते चुकाते असल बेटे बेटियों के नाम कर,इस दुनिया को अलविदा कह जाता,,,
,फिर से 21वीं सदी में भी वही महाजन प्रथा नए रूप में हंमारे सबके सामने मुंह बाए खड़ी हो गयी है,,
आपका सबकुछ गिरवी रखवाने के लिए,,,,
नमस्कार में,,फला जगह से बोल रही हूं,,आपने मोबाइल लिया था उसके एवज में हमारी कम्पनी से 69 हज़ार का लोन पास किया था,,आप लेना चाहेंगे,,,आज के महंगाई व बेरोज़गारी के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा युवा बुजुर्ग यह सोचकर हाँ बोल देता है कि चलो कुछ नया समान घर पर ले आएंगे,,या कोई छोटा मोटा काम शुरु कर देंगे,,
औऱ हालात से मजबूर इंसान उनकी मीठी बांतों में फंस जाता है,,
तो ठीक है आपको बताना चाहेंगे कि आपकी मासिक किश्त 3800,/- rs आएगी जो आपको 3 साल तक चुकानी होगी,,,अभी फोन पर ही आपका फार्म fiil कर देती हूँ,,आपको यह पैसा मात्र 2 दिनों में आपके बैंक में ट्रांसफर हो जाएगा,,इस लालच में की पैसा तुरन्त मिल रहा है,,उनके झांसे में आजाता है, बिना हिसाब लगाए की उसको अंत मे कितना चुकाना होगा,,,,मजे की बात अगर आप 1 या 2 महीने इन्हें रेस्पॉन्स नहीँ देते तो यह 2 महीने बाद फिर फोन कर आपकी लोन की राशि बढ़ा देती है ,,
यानी 69 हज़ार के लगभग 1लाख 40 हज़ार । दुगने से भी ज्यादा,,और रकम लोगे तो समझलो जाल में फंस गए,,,
ऐसी कई कंपनियां हैं जिन्होंने जनता को लालच दे लूटने का काम शुरू कर दिया है,,,,
अगर रफली हिसाब लगाएं तो ब्याज 26 से 33 % तक हो जाता है,,,

अब सवाल यह उठता है,,की RBIकी कोई गाइडलाइन्स हैं कि नहीँ की आप कितना ब्याज वसूल सकते हैं,या निजी फाइनेंस के नाम पर मनमर्जी करोगे,,
ऊपर से किसी का ख़ौफ़ नहीँ,,,
तो फिर संविधान में कानून की धाराएं क्यों,
जब यह गुंडे ही आपका फैसला सुनाएंगे तो,,,
यह बहुत गम्भीर समस्या है,
सरकार व रिसर्वे बैंक ऑफ इंडिया को इस बारे में विचार करना होगा,,ब्याजदर पर नियंत्रण करना होगा।

ऐसा दुपहिया ,फोर व्हीलर सभी मे फाइनेंस कम्पनियों के मकड़ जाल फैला हुआ है,,
अगर आपको लगता है यह महाजन प्रथा गलत है, इसके जाल में युवा पीढ़ी ना फंसे तो आमजन की आवाज़ बनो।