खाटू श्याम बाबा के दरबार में उमड़ा लाखों श्रध्दालुओं का भक्तिमय जनसैलाब,खाटू श्याम पर विशेष ,,,,

1459

कृष्ण-भक्तों का सैलाब चल पड़ता है इन दिनों खाटूधाम में

जयपुर 17मार्च2019।(निक धार्मिक)हिन्दू धर्म की धार्मिक पुस्तक महाभारत में भीम के पौत्र बर्बरीक का नाम विशेष स्थान रखता है। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा बर्बरीक को यह आशीर्वाद प्राप्त था कि वह कलयुग में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण (श्याम) के नाम से पहचाने व पूजे जाएंगे। महाभारत की लड़ाई के बाद भगवान् कृष्ण द्वारा बर्बरीक का शीष, रूपवती नदी में डुबोया गया था। कई वर्षों के बाद जब कलयुग शुरु हुआ तो खाटू गांव में अचानक एक गाय के थनों से दूध की धारा बहने लगी।
गांव वालों ने उस स्थान की खुदाई की तो वहां गड़ा हुआ बर्बरीक का शीष प्राप्त हुआ जो कि एक ब्राहम्ण को सौंपा गया जिसने काफी समय तक उसकी पूजा की। खाटू गांव के नरेश रूपसिंह चौहान को स्वप्न में कहा गया कि वह इस शीष को स्थापित करने के लिए एक मन्दिर बनायें। फाल्गुन की ग्यारह तारीख़ को शुक्ल पक्ष में यह स्थापना की गई। असली मन्दिर 1027 ए.डी. में खाटू गांव के नरेश रूपसिंह चौहान तथा पत्नि नर्मदा कंवर द्वारा बनवाया गया। 1720 ए.डी. में दीवान अभय सिंह ने इस मन्दिर का जीर्णोद्धार कराया। उसी समय एक विशेष पत्थर की बनी हुई उस प्रतिमा को गर्भ गृह में स्थापित किया गया। I
इस मन्दिर में कृष्ण जन्माष्टमी, जल-झूलनी एकादशी, होली तथा वसंत पंचमी उल्लासमय मनाई जाती है। लाखों श्रद्धालु, नव-दम्पति तथा नव जन्मे शिशुओं को मुंडन के लिए यहां लाया जाता है। प्रतिदिन पांच बार भावभीनी-मंगला, श्रंृगार, भोग, संध्या तथा शयन आरती की जाती है। प्रत्येक माह की शुक्ल पक्ष की 11 तथा 12 तारीख़ को विशेष प्रार्थना होती है। क्योंकि बर्बरीक का जन्म कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की 11 तारीख़ को हुआ था तथा फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की 12 तारीख़ को उन्होंने अपना शीष भगवान् श्रीकृष्ण को अर्पित किया था।
इन दो तारीखों पर हज़ारों भक्त विशेष दर्शन हेतु आते हैं तथा बीच की रात भर मन्दिर खुला रहता है। भजन मंडलियों को कार्यक्रम प्रस्तुत करने हेतु बुलाया जाता है। श्याम कुंड, जहां से प्रतिमा प्राप्त हुई थी, भक्त गण तथा विशेष तौर पर बीमार लोग चंगे होने के लिए इसमें डुबकी अवश्य लगाते हैं।
जयपुर से लगभग 100 कि.मी. की दूरी पर चौमू होते हुए रींगस के पास खाटू श्याम जी नाम का मन्दिर राजस्थानियों का तो क्या, दूर सुदूर प्रान्तों में बसे प्रवासी राजस्थानियों का भी आस्था का महान केन्द्र है। खाटू बाबा का धाम ऐसे शान्त और सुन्दर स्थान पर है कि जहां वृद्धावस्था के श्रद्धालु महीनों रहते हैं तथा मण्डलियों में भजन कीर्तन गाकर अपना समय आस्था में गुजारते हैं।
जो यहां खाली झोली लेकर आता है, वो खाटू बाबा से मन्नत मांग कर अपने आप को धन्य महसूस करता है। कलकत्ता, चैन्नई, मुम्बई, बैंगलुरु और दिल्ली जैसे महानगरों में रहने वाले प्रवासी राजस्थानी 10 दिन का समय प्रति वर्ष, श्याम बाबा के दरबार में शीश नवाने के लिये निकालते हैं। बड़े बड़े प्रवासी राजस्थानियों, व्यापारी-दानियों ने खाटू बाबा के गांव में लगभग 800 धर्मशालाएं बना रखीं हैं, जिनका शुल्क नाममात्र है। खाटू में बनी हुई धर्मशालाओं में कुल लगभग 8000 कमरे हैं। दानियों के संगठनों ने वहां पर बिजली, पानी, प्रशासन आदि की व्यवस्था इतनी बढ़िया कर रखी है जो देखते ही बनती है।
होली से 4 दिन पहले फाल्गुन सुदी ग्यारस को बाबा के दरबार की शोभा बढ़ाने के लिये एक विशाल झांकी का आयोजन किया जाता है। वह झांकी और लवाजमा, गाते-बजाते नृतक-नृतकियाँ, खाटू गांव में दोपहर 2 बजे से रवाना होेकर शाम तक चलती हैं। जिसमें दो घोड़ों का एक ऐतिहासिक रथ होता है, जिसमें खाटूबाबा की झाँकी विराजमान होती है। ग्यारस को इस झांकी के दर्शनार्थ आसपास के लाखों की संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं।
ज्यों-ज्यों होली नज़दीक आती जाती है, सीकर ज़िले के खाटूधाम में प्रारम्भ होने वाले वार्षिक फाल्गुन मेले में श्रद्धालुओं की आवक तेज़ होती जाती है। खाटूश्याम मार्ग पर श्याम भक्तों का सैलाब दिखाई देता है। महिला, पुरूष एवं बच्चे, जयकारे लगाते हुए, गुलाल उड़ाते व नंगे पांव पैदल खाटूधाम पहुंचते हैं। फाल्गुनी धुन और भजनों की रसगंगा में डुबकी लगाते श्रद्धालु, मन में अटूट आस्था लिए, बाबा के दरबार, सैंकड़ों भक्त हाथांे में केसरिया निशान थामे पहुंचते हैं।
जयपुर की सड़कों पर इन दिनों खाटू के भक्तों का सैलाब नज़र आता है। माहौल को और भक्तिमय बनाने के लिए लाउड स्पीकरों को अपने साथ ट्रैक्टर-ट्रॉली, ऊंटगाडों व रिक्शों में रखकर नाचते-गाते बाबा के दरबार में हाज़री देने आते हैं। श्याम भक्तों के लिए रास्तों में भंडारे भी चालू हो गए हैं, जिसमें पानी, चाय, ज्यूस व नाश्ते का सामान निःशुल्क वितरित किया जा रहा है। खाटूधाम में श्री श्याम मंदिर को सजाने का कार्य बंगाल से आए कारीगरों द्वारा किया जाता है।
राजस्थान राज्य भारत स्काउट व गाइड के तत्वाधान में हर वर्ष की भांति खाटूश्याम जी के मेले के सुअवसर पर इस वर्ष भी गुरूवार 14 से 18 मार्च तक मेला-सेवा-शिविर का आयोजन किया जायेगा, जिसमें सीकर ज़िले से स्थानीय संघ दांता, धोद, फतेहपुर, लक्ष्मणगढ, नीम का थाना, श्रीमाधोपुर, रींगस, शिश्युरानोली, सीकर, खण्डेला, जयपुर, अलवर दौसा से भी स्काउट रोवर व स्काउट मास्टर सेवाएं प्रदान करेंगे, जिसमें खोया-पाया, भीड़ नियंत्रण, पूछताछ, उद्घोषणा करवाना, जल सेवा, कतारबद्ध दर्शन करवाना, प्राथमिक चिकित्सा आदि कार्यों को पांच दिन तक, दिन रात सेवा की जायेगी। इसके साथ साथ उपरोक्त स्थानों पर यात्रियों की सेवार्थ ’सेवा-शिविर’ भी आयोजित किये गए हैं।
स्वयंसेवी संस्थाओं के कर्मचारी सीने पर बिल्ला टांग कर, जनता की सेवा में होते हैं जो अनुशासन और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाये रखते हैं। स्नान के लिये एक चौकोर पुराना कुण्ड है और उस कुण्ड के छोटा पड़ने पर सन् 1990 में ’नये श्याम कुण्ड का निर्माण’ किया गया था, जो गोलाकार है। इन दिनों में राज्य प्रशासन द्वारा खाटू बाबा के दशनार्थ रेवाड़ी, सीकर की ओर से विशेष रेलें तथा राजस्थान रोडवेज की बसें चलाई जाती हैं। खाटू श्याम जी मेले में अब विदेशी पर्यटक भी काफ़ी संख्या में पहुंचने लगे हैं। राजस्थान के पर्यटन, कला-संस्कृति विभाग के सीकर व झुंझनू कार्यालयों के अधिकारी, पर्यटकों व भक्तगणों को पर्यटन संबंधी सूचना तथा सहायता हेतु अपना एक काउंटर लगाते हैं, जिस पर पर्यटन-साहित्य भी उपलब्ध रहता है।
आलेख एवं चित्र-वरिष्ठ पत्रकार लियाकत अली भट्टी