मानवीय मूल्यों की अवहेलना व संवेदनहीनता की मिसाल बना ,जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल,उद्घाटन के चंद घण्टों बाद हुए हादसे में घायल वरिष्ठ फ़ोटो जर्नलिस्ट को पेड़ गिरने से सर पर आई चोट के इलाज के लिए लेजाया गया ,12 किलोमीटर दूर एक निजी अस्पताल में,रास्ते में हो सकती थी अनहोनी,फिर इलाज का खर्चा देने से किया इनकार, आये हैं सर पर 12 से 15 टांके,मैनेजमेंट ने कहा यह स्थान।फेस्टिवल के अधिकार क्षेत्र से बाहर, जबकि टिकिट व पास पर लंच व डिनर की व्यवस्था है,मतलब साफ स्वयं की सुरक्षा का इंतजाम कर जाएं J L F राज्य सरकार को अब तो लेना होगा संज्ञान

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जब राज्य का सबसे बेहतरीन अस्पताल सवाईमानसिंह था मात्र 100 कदम दूर, सर्वश्रेष्ठ ट्रॉमा वार्ड,व प्रतिश्ठित डॉक्टरों की टीम,
फिर क्यों नहीं कि गयी सर पर लगी चोट की परवाह,क्यों नहीँ दिखाई गम्भीरता,,

जयपुर 24 जनवरी 2019।(NIK culture) एक साधारण सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब राज्य का प्रतिश्ठित अस्पताल सवाई मानसिंह मात्र 100 कदम दूरी पर है,चोट सर की है,गम्भीर है,वरिष्ठ पत्रकार का है मामला,लगभग 12 टांके आये हैं,सर में गढ्ढा होना भी बताया जा रहा है, जहाँ मुख्यमंत्री,सभी मंत्रीगण,नौकरशाह आदि ,सुदूर से आते आमजन की प्राथमिकता सवाईमानसिंह अस्पताल ही है,फिर 12 किलोमीटर स्तिथ निजी अस्पताल CK बिड़ला क्यों ले जाया गया ,सवाल अब गम्भीर जो चुका है,,
खबरें हैं कि CK बिड़ला निजी अस्पताल इस फेस्टिवल का स्पोंसर्ड है जिसका काउंटर वहां दिखाई दे जाएगा,शायद सभी इलाज का ठेका इसी अस्पताल को दिया गया है।
मानवीय मूल्यों व असंवेदनशीलता का नज़ारा व जयपुर लिटरेचर का असली चेहरा तब सामने आया जब तथाकथित स्पोंसर्ड निजी अस्पताल ने वरिष्ठ फ़ोटो जर्नलिस्ट के परिजनों को बिल का पेमेंट करने को कहा गया, सिर्फ अस्पताल तक लाने की जिम्मेदारी।फेस्टिवल के कारिन्दों की है, यह कहकर झाड़ा पल्ला,।
वो तो एक पत्रकार ने अपने रसुकात के चलते फेस्ट के मैनेजमेंट को हरकत में लाने को मजबूर किया,वरना सब भली भांति पतिचित हैं कि आज जयपुर जैसे बड़े शहर में निजी अस्पतालों में सर जैसी गम्भीर चोट के इलाज की कितनी बड़ी कीमत चुकानी होती है ।

इस बाबत फेस्ट के मैनेजमेंट का कहना है कि जिस एरिया में यह हादसा हुआ है वह लिटरेचर फेस्टिवल के अधिकार क्षेत्र में नहीँ है,,। जबकि टिकिट व पास के जरिये उस स्थान पर।लंच व डिनर की व्यवस्था की गई है।
कमाल है, कमाल है, उस से भी कमाल मीडिया जगत भी इस मामले में चुप्पी साधे बैठी है, ना जाने क्यों, यह खामोशियाँ कब तक,
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